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Friday, January 27, 2012

रचना : ऐसा कलयुग आएगा ( प्रहार )


ऐसा कलयुग आयेगा
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रामचन्द्र जी कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगा,
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा
भ्रष्ट्र एवं बेईमान व्यक्ति,राज्यों का कार्य-भार चलायेगा
पढ़ालिखा एवं योग्य व्यक्ति,देखता व् देखता रह जायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा – २||

अनपढ़ नेता भी सूट-बूट पहन,विदेश भ्रमण को जायेगा
विमान में अन्दर बैठा मंत्री महोदय,काजू-किशमिश खायेगा
वातानकूलित कार में जब,हाथ हिलाता वापस आयेगा
दूर खड़ा गरीब बेचारा, बस हाथ देखता रह जायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा – २||

आपदा आये कहीं तो केद्र से सहायता पहुँचाया जायेगा
बाढ़-भूकंप में फसी जनता सहायता के लिए तरसता रह जायेगा
और सारे मिडिया के सामने चिल्लाता रह जायेगा
पर पहुँचने को समान कहीं, कहीं और पहुँच जायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा – २||

मर जाएँ हजारों-लाखों,तो टीवी पर एक शोक समाचार जरुर आयेगा
केंद्रीय मंत्री पिछले दस सालों के तरह,यह घोषणा कर के जायेगा
घायलों को पच्चास हजार, एवं मरनेवालों को एक लाख दिया जायेगा
विश्वास है परिवारजनों को,यह पैसा शायद हीं कभी मिल पायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा– २||

नहीं सुना होगा ऐसा कारनामा,राजनीति में सुनने को आयेगा
नोटों से भरा बैग संसाद में जब खोला जायेगा
सचाई गवाहों और सी डी के चक्कर में फसकर रह जायेगा
न्यायलय सच को झूठ, झूठ को सच करके दिखलायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा– २||

अगर पैसा हो पास तो,सचाई को आराम से छुपा लिया जायेगा
बी ऍम डब्लू जसिका चारा अलकतरा वर्दी कॉम्मनवेल्थ या हो टू जी
सारे कांडों पर पर्दा पड़ता रहा है और पडता रह जायेगा
गरीब न्याय मागने वाला खुद को जेल में सडता पायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा– २||

कालाबाजारी घुसखोरी भ्रष्टाचारी, अपने चरम सीमा पर पहुँच जायेगा
रामदेव- अन्ना जैसा वीर पुरुष, कालाधन व लोकपाल पर आवाज़ उठायेगा
मनाने समझाने के बाद भी जब, देश की आवाज सत्ताधारिओं के समझ न आयेगा
अनसन पर बैठे लोगों को, रातोंरात डंडा गोली और बम द्वारा भगाया जायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा– २||

आरक्षण व जाति के नाम पर, बार बार चुनाव जीत लिया जायेगा
पिता के बाद पुत्र व पत्नी को,राज्य का कार्यभार सौंपा जायेगा
यह वंशानुगत परंपरा चलता आया है,और चलता ही चला जायेगा
ईमानदार व काबिल नेता,देखता व देखता हीं रह जायेगा
हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खायेगा– २||

न जाने क्यू ऐसा लगता है, कि जल्द हीं ऐसा समय आयेगा
जब मेरा देश फिर से, सोने की चिड़िया कहलायेगा
राम जैसा व्यक्ति फिर से, इस देश का कार्यभार चलायेगा
और विश्व के मानचित्र पर, फिर से तिरंगा लहराया जायेगा
तब कौवा चुगेगा दाना और हंस मोती खायेगा– २||
तब कौवा चुगेगा दाना और हंस मोती खायेगा– २||

शशिधर मिश्र, विशाखापट्नम ..इस पोस्ट की सारी क्रेडिट " शशिधर " जी को जाती है ...तहे दिल से सुक्रिया

इस ब्लॉग में पढ़ने लायक और भी है :

१) शहीद की आत्मा जब रोती है

२) ना चड्डी ना बनियान फिर भी मेरा भारत महान

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3 comments:

  1. वास्तव में बहुत ही बुरे लोग पैदा हो गए हैं.

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  2. श्री शशिधर मिश्र जी की यह कविता बेहद शानदार लगी, साथ ही अंतिम पंक्तियों में उन्होंने हमारे विश्वास को और भी पुख्ता कर दिया। निश्चित रूप से ऐसा समय भी आएगा जब समूचे विश्व में भगवा लहराया जाएगा, राम राज्य आएगा, भारत फिर से विश्वगुरु कहलाएगा।
    मिश्र जी की यह सुन्दर कविता हम तक पहुँचाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

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