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Wednesday, March 22, 2017

मेरा रंग दे बसंती चोला :शहीद भगतसिंह का FIR मे नहीं था नाम ( वीडीओ )

वीर शहीद भगतसिंह ने फाँसी के पहले ३ मार्च को अपने भाई कुलतार को भेजे एक पत्र में भगत सिंह ने लिखा था -

उन्हें यह फ़िक्र है हरदम, नयी तर्ज़-ए-ज़फ़ा क्या है?  
हमें यह शौक है देखें, सितम की इन्तहा क्या है?
दहर से क्यों ख़फ़ा रहें, चर्ख का क्या ग़िला करें।
सारा जहाँ अदू सही, आओ! मुक़ाबला करें।।

वीर शहीद भगतसिंह को फांसी दी गई मगर पुलिस मे दर्ज FIR मे भगतसिंह का नाम नहीं था

वीर शहीद भगत सिंह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़े आदर्श है। इन्होंने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें २३ मार्च १९३१ को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया।

भगत सिंह का जन्म २७ सितंबर १९०७ को हुआ था। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। यह एक शीख परिवार था। अमृतसर में १३ अप्रैल १९१९ को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी।

काकोरी काण्ड में राम प्रसाद 'बिस्मिल' सहित ४ क्रान्तिकारियों को फाँसी व १६ अन्य को कारावास की सजाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि पण्डित चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड गये और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। इस संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था।

भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर १७ दिसम्बर १९२८ को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे० पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने वर्तमान नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार संसद भवन में ८ अप्रैल १९२९ को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी

ये विडीओ वीर शहीद भगतसिंह की याद मे



एक नजर यहाँ भी करे :
http://eksacchai.blogspot.in/2014/05/bhagatafter83years.html

Saturday, July 2, 2016

3 मर्डर 3 मंगलवार और “ स्टोन कीलर “

राजकोट : आखीर जामनगर से पकड़ा गया दरीन्दा “ स्टोन कीलर “ हितेश दलपत रामावत , 50 दीन मे 3 लोगो को “ पत्थर मारकर “ मार डाला था और मृतक के मोबाइल फोन से मृतक के घरवालो को फोन करके कहेता था “ मैंने आपके भाई को /पीता को टपका डाला है “ |

 3 लोगो का हत्यारा हीतेश मर्डर “ मंगलवार “ को ही करता था ,मर्डर करने के बाद हितेश जामनगर चला जाता था पुलिस को हितेश के पास से 22 मोबाइल बरामत हुवे, राजकोट समेत पूरे सौराष्ट्र मे हाहाकार मचा दीया था इस स्टोन कीलर ने |

हितेश “ स्टोन कीलर ने सागर मेवाड़ा का पहला मर्डर 20 अप्रील के दीन राजकोट के भक्तिनगर स्टेशन प्लॉट मे कीया था तो दूसरा मर्डर 23 मई के दीन मुंजका गाव के पास एक ऑटो रिक्षा ड्राइवर प्रवीण का किया था और तीसरा मर्डर 2 जून के दीन वल्लभ रंगानी का किया था , पुलिस की जांच मे पता चा की स्टोन किलर “ गे “ है क्यू की 3 मृतको की पेंट पर वीर्य मिला था

राजकोट पुलिस कमिश्नर अनुपसिंह गेहलोत न बताया की स्टोन किलर को पकड़ने 1200 से भी ज्यादा पुलिसकर्मीयो की टीम बनाई गई थी और स्टोन किलर 6 महीनो से जामनगर के बेडी मे एक रूम रेंट पर रखकर रहेता था घर से निकाला गया स्टोन किलर राजकोट के मवडी क्षेत्र मे रिक्शा चलाता था जिससे वाकिफ था मवडी क्षेत्र से

पुलिस ने इस खतरनाक स्टोन किलर को पकड़ने के लिए 2 लाख रुपये का इनाम भी रखा था प्राप्त CCTV विडीओ फुटेज और इस स्टोन किलर के हमले मे बचनेवाले शख्शो की मदद द्वारा बनाए गए स्केच को लोगो के सामने रखा था मगर स्टोन किलर बेरहम था पुलिस ने 18 शकमंदों को शॉर्ट लिस्ट किया था

मंगलवार ही क्यू चुनता था स्टोन किलर हितेश ?


किलर हितेश पहला मर्डर करने मंगलवार की रात जामनगर से निकला था तब से वो इस दीन को शुभ मानने लगा था उसके बाद 2 हत्या के लीये भी वो जामनगर से मंगलवार की रात को ही निकलता था और हत्या करने के बाद वो वापस जामनगर चला जाता था

पुलिस बनी “ गे “

इन हत्याओ के पीछे समलेंगीक संबंध सामने आने पर पुलिस ने राजकोट मे “ गे “ सोसायटी मीलन जगह की लीस्ट बनाई थी और पुलिस कर्मी खुद रात मे ऐसी जगहो पर “ गे “ बनकर जाने लगे और “ स्टोन किलर “ की जानकारी एकत्रीत करने लगे थे

पुलिस ने हितेश रामावत को जामनगर से का रात कड़ी महेनत के बाद पकड़ा


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