:

Friday, May 31, 2013

आज देश मे उथल-पुथल क्यो ?

आज देश में उथल-पुथल क्यों,

क्यों हैं भारतवासी आरत?

कहाँ खो गया रामराज्य,

और गाँधी के सपनों का भारत?


आओ मिलकर आज विचारें,

कैसी यह मजबूरी है?

शान्ति वाटिका के सुमनों के,

उर में कैसी दूरी है?


क्यों भारत में बन्धु-बन्धु के,

लहू का आज बना प्यासा?

कहाँ खो गयी कर्णधार की,

मधु रस में भीगी भाषा?


कहाँ गयी सोने की चिड़िया,

भरने दूषित-दूर उड़ाने?

कौन ले गया छीन हमारे,

अधरों की मीठी मुस्काने?


किसने हरण किया धरती का,

कहाँ गयी केशर क्यारी?

प्रजातन्त्र की नगरी की,

क्यों आज दुखी जनता सारी?


कौन राष्ट्र का हनन कर रहा,

माता के अंग काट रहा?

भारत माँ के मधुर रक्त को,

कौन राक्षस चाट रहा?
 
                       " देश की असलियत दर्शाती ये रचना ने दिल जीत लिया ये सच ही है की " सोने की चिड़िया " कहाँ गई ? ...इस रचना का आखरी पड़ाव तो बेहतरीन है जो बहुत कुछ कहे रहा है जरा आप भी गौर करे इन अल्फ़ाज़ों पर जो आज के दौर का सचोट चित्रण कर रहे है ..." 

**


कौन राष्ट्र का हनन कर रहा,

माता के अंग काट रहा?

भारत माँ के मधुर रक्त को,

कौन राक्षस चाट रहा?
**
 
      " ये रचना के रचियेता है मेरे आदर और मेरे मार्गदर्शक "श्री रूपचन्द्र शास्त्री जी" जिन्होने हर वक़्त मेरा उत्साह बढ़ाया है " 

" आदरणीय रूप चन्द्र शास्त्री जी "


उनके ब्लॉग की आप भी सफर करे ( यहाँ क्लिक करे )  :


यहाँ पर भी मीलेंगे आदरणीय शास्त्री जी

 ::::
:::
 

10 comments:

  1. Replies
    1. आदरणीय शास्त्री जी आभारी तो मै आपका रहूँगा की आपने मुझे इस शानदार दिल को छूनेवाली रचना इस ब्लॉग पर लगाने के लिए अनुमति दी

      Delete
  2. Replies
    1. सच कहा आपने ये है ही प्रभावी रचना

      Delete
  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(1-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
    Replies
    1. वंदना जी आपका बहुत बहुत आभार

      Delete
  4. Replies
    1. पूरण जी... सही कहा आपने मगर इस सुंदर रचना के असली हकदार है आदरणीय शास्त्री जी

      Delete
  5. बेहतरीन लिखा है शास्त्री जी ने...

    ReplyDelete
    Replies
    1. शाह नवाज भाई सही कहा ये दिल को छूनेवाली रचना है

      Delete

आओ रायता फैलाते है

Note: Only a member of this blog may post a comment.