:

Monday, October 10, 2011

"व्यंग : ताजा अमीर हु मै |"


" कन्नु भिखारी और रामु भिखारी आज बड़े ही खुश थे,क्यु की अब उनकी भी गिनती सरकार के आशीर्वाद से देश के अमीरों में होने लगी थी जो ..गेटवे ऑफ़ इंडिया के सामनेवाली सड़क पार कर के वो "होटल ताज "की तरफ जा रहे थे ..वही फटे और मस्त बदबूदार कपड़ो के साथ ..अपने हाथ में "अपनी दूकान याने कटोरा "लिए ..बढ़ी हुई दाढ़ी, चकाचक पीले दांत और बात करते वक़्त मुहं से आती हुई बेहोश करनेवाली बदबू के साथ के अचानक कन्नु भिखारी की नजर रस्ते पर पड़ी आधी पीकर फेंकी हुई सिगरेट पर पड़ी ..उसने वो उठाली तो रामु भिखारी बोला " रख दे ..बाद में पियेंगे पहले कुछ चाय पीते है | "...कहेकर वो "होटल ताज" की और बढे तो कन्नु भिखारी बोला " अबे ,रामु ये तो अमीरों का होटल है |"...." तो क्या हुवा हम भी तो अमीर है ..तु चल ना, आज तो चाय इसीच होटल की पीनी है |"...." अरे मग़र रामु ,ये लम्बी टोपीवाला क्या हमे अन्दर जाने देगा क्या ? "..."कायको , अरे बाबा तु टेंशन मत ले ?मेरे पास पैसे है और अब तो हमे कोई रोक नहीं सकता ..और तु इस लम्बी टोपीवाले से डरता है क्या ?..अरे वो भी आपुन के माफिक भिखारी ही है ..देख जितने भी लोग बाहर निकलते है वो झुक कर सलाम मारता है तो लोग उन्हें हसकर पैसा देता है ..है ना ? फिर ..टेंशन नको रे बाबा |"

" कन्नु और रामु अब "ताज होटल" के अन्दर दाखिल हो रहे थे की दरवान ने उन्हें रोका और पुछा "क्या है ? "..."ले बोल इसको ये भी पता नहीं की ये होटल ..हम से ही पुछ रहा है |"हस्ते हुवे कन्नु बोला मग़र मुह से आती हुई खुशबु की वजह से दरवान अपनी नाक पकड़कर बोला " ये तो मुझे भी पता है |".."पता था तो पुछा क्यु ?" रामु भिखारी बोला ..."आप लोग जाओ यहाँ से ..|"दरवान के कहने पर "चले जायेंगे पहले चाय तो पीने दे |"..." ओये मैंने कहा ना जाओ यहाँ से ये अमीरों का होटल है ..तुम जैसे फटे ,बेहाल ,गरीब और भिखारी का नहीं है ...|"...."ए टोपी ,बस हो गया हाँ ..तु गरीब किसको बोला रे ? ..बताना ..किसको बोला ?"..." अबे तुझको बोला मै गरीब भिखारी ..कहाँ से आ जाते है बदबूदार |"..तभी एक आदमी अन्दर से बाहर निकला और दरवान ने झुककर उसे सलाम किया तो उस आदमी ने दरवान को ५० का नोट दिया तो तुरंत ही कन्नु भिखारी बोला " ओये ,हम रास्तो पर भीख मांगते है और तु दरवज्जे पर है तो तु भी हमारी ही कौम का ..चल अब दरवज्जा खोल और हमे अन्दर जाने दे |"...ऐसा कहने पर दरवान को गुस्सा आया और उसने रामु भिखारी को धक्का दे दिया ..तो शोर शराबा सुनकर होटल का मेनेजर बाहर आया और बोला "क्या हुवा ?"..." लगता है ये अँधा है ...इसके लिए चर्चगेट की जगह ठीक रहेगी |" रामु भिखारी बोला ..."तु देखता नहीं है क्या ..कपडे तो अच्छे पहने है |"

"दरवान ने तुरंत सलाम मारी और बोला "सर,ये लोग सामने रोज भीख मांगते है और आज यहाँ पर आकर कहते है की अन्दर जाने दो चाय पीनी है ..मैंने इनको बहुत समजाया मग़र ये मानते ही नहीं है |"..." आपको चाय पीनी है |"..मेनेजर बोला तो तुरंत ही दोनों भिखारी ने अपना सर हिलाया कहा "हां ".."ठीक है ..मग़र याद रहे ये होटल अमीरों का ही है यहाँ चाय भी बहुत ही महेंगी मिलती है ..सोच लो|".."पैसे का टेंशन नहीं है अपने को और इस टोपी वाले को बोल की औरो की तरह हमे भी सलाम मारे | ".....जिसे ही मेनेजर ने दरवान की तरफ देखा दरवान ने तुरंत ही दोनों भिखारीयों को सलाम मारी .."दरअसल ये होटल अमीरों का है ..इस लिए ..."..." अबे तु बार बार ये अमीर अमीर क्या बोल रहा है ...हम भी तो अमीर है ...|"..."अच्छा तो आप अमीर है ..मै जन सकता हु की आपका धंधा क्या है और कौन सी जगह पर है ...|"......"इतनाच ना ?...तो सुन अपुन का धंधा भीख मांगने का है और "बोरीवली से लेकर मुंबई सेन्ट्रल" तक अपना धंधा फैला हुवा है ..किसी को पुछ की "कन्नु और रामु भिखारी" कहाँ है तो कोई भी बताएगा यकीं ना आये तो ये देख हमारा विसिटिंग कार्ड |"..कहेकर रामु भिखारी ने अपने मस्त बदबूदार थैले में से "अपनी दुकान कटोरा "निकाला |.....

" ये सब यहाँ नहीं चलेगा मैंने पहले ही बोला है की ये होटल ...|"..." अमीरों का है ..ऐसाच ना ? बार बार क्या अमीरों का अमीरों का लगा रखा है ..हम वाकई में अमीर है अगर यकीन ना आये तो लगा फ़ोन |"..." किसको लगाऊ फोन" ..मेनेजर बोला..."अबे खुजली की दुकान ...फोन लगा देश के माननीय प्रधान मंत्रीजी को और पुछ ..क्या हम देश के ताजा अमीर है की नहीं ?ताजा बोले तो पता है ना ..२६ और ३२ वाले क्या ..उन में से हम ३२ वाले ताजा एक दम ताजा अमीर है ..तु लगाना फोन ..कौन है रे अपना प्रधान मंत्री ..क्या रे धंधे में इतना बीजी रहेता हु ना की प्रधान मंत्री का नाम भी याद नहीं है ..बहुत मस्त आदमी है ये प्रधान मंत्री ..अरे हमको तो पता ही नहीं था की हम इतने अमीर है ...देख अब तुजे पता था क्या ?...नहीं ना ?...फिर ...चल अब चाय लेकर आ ..मस्त हाँ ..एक दम मलाई बिलाई मारके लेकर आना और हाँ तु फ़ोन तो करना ही ..इस प्रधानमंत्री ने तो हमे एक ही रात में अमीर बना दिया यार ..नाम क्या है रे ?..."...तो कन्नु भिखारी बोला "आदरणीय ,माननीय , मनमोहन सिंह जी ..क्यु सही ना ?... "..हाँ वहिच ..बड़ा दिमाग वाला आदमी है ये गरीबी को मिटा डाला एक जटके में और कर दिया सबको एक ही रात में अमीर ..जादूगर बोलते है इसको ,,देखना एक दिन अमेरिकावाले भी इसकी आइडिया का इस्तेमाल करेंगे ..कोई गरीबच नहीं रहेगा सब अमीर ..एय कन्नु ,तु भी एक स्विस बैंक में खाता खुलवा लेना भाई वक़्त आनेपर जरूरत पड़ेगी ..ना जाने कब हम अमीर से अरबपति बनजाये अगर ये जादूगर माननीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह रहे तो एक ना एक दिन हम अरबपति भी बन जायेंगे... क्यु सही बोला ना ? "...वो तो ठीक है मग़र सर यहाँ एक चाय का १०० रुपये दाम है ..कितनी लाऊ चाय ...|"

" अबे बैठने तो दे ...|" कहते एक मस्त टेबल पर दोनों जा बैठे और आराम से अपने थैले को बगल में रखा ..मग़र कटोरा नीचे गिरा तो "अबे संभाल अपनी दुकान जिसने अपने को अमीर बनाया है |"कहेकर हसने लगा कन्नु "रामु ,यार यहाँ तो १०० रुपये की चाय है |"..सभी "वी आई पी" देख रहे थे और हस रहे थे ..देश के ताजा अमीर पर ..कन्नु और रामु चुप हो गए टेबल पर पड़ा ठन्डे पानी का गिलास उठाया और पानी पिया ..तभी एक आदमी होटल के मेनेजर के पास गया और कहने लगा की इन भिखारियों को बाहर निकालो ..बदबू आ रही है ..तो उसके समर्थन में सभी लोग कहने लगे की बाहर निकालो ....मेनेजर ने दो हट्टे कट्टे पहलवानों की और देखा ..पहलवान आये और "कन्नु और रामु " को उठाकर बाहर ले गए और रस्ते पर फेंक कर चले गए ..थोड़ी देर में उनकी बेग और उनकी दुकान भी रस्ते पर फेंक दी गई ...तो दरवान बोला "क्यु कैसा रहा ?...देश के ताजा अमीरों |"...

"कन्नु ने रस्ते में पड़ा अपना कटोरा उठाया ..और बडबड़ाया "लगता है माननीय प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने हमारा मजाक उड़ाया है |...और भीड़ की और बढ़ते हुवे कहने लगा "माई कुछ दे दो ...बाप कुछ दे दो ...अल्लाह के ना पर दे दो ..राम के नाम पर कुछ दे दो ..भगवान तुम्हारा भला करेगा ..इस गरीब को कुछ दे दो ..कुछ देना हो तो ही देना मग़र झूठे सपने मत दिखाना ..माई ..बाप ..कुछ दे दो |"

तभी कटोरे में किसीने १ रुपये का सिक्का डाला ..शायद वो सिक्के की खनक ..दिल्ली संसद में बैठे इस देश के माननीय ..आदरणीय ...प्रधानमंत्री और सांसदों के कानो तक कभी नहीं पहुंचेगी ..और यूँही गरीबी सिर्फ कागजों पर कम होती रहेगी असल में बढ़ती ही रहेगी ..ये अमीर होते रहेंगे कागज पर वो अमीर होते रहेंगे स्विस बैंक के अकाउंट में ..गरीब आटा बनता जायेगा और महेंगाई की चक्की यूँही चलती जाएगी ...गरीबों का आटा बनानेवाले भी यही है ..महेंगाई बढ़ानेवाले भी यही है ....गरीबों को एक रात में २६ और ३२ के चक्कर में अमीर बनेवाले भी यही है ..ये बदलते जायेंगे ...मग़र गरीब कभी नहीं बदलेगा ..अगर ऐसा ही चलता रहा तो गरीब की गरीबी और गरीब बढ़ते ही जायेंगे ...काश वो सिक्के की खनक ..उन सोये हुवे ...माननीय और आदरणीय लोगो तक पहुंचे जो लीन है भ्रस्टाचार की गंगा में....|"


जय हिंद
जय हिंद
जय हिंद


सुक्रिया गूगल :

3 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति, बधाई स्वीकारें

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति, बधाई


    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें /

    ReplyDelete
  3. bhut bddhiya hai sa. badhi ho .kabhi hamari side ko bhi dekhe.

    ReplyDelete

आओ रायता फैलाते है

Note: Only a member of this blog may post a comment.