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Wednesday, August 10, 2011

"कौन जीतेगा शर्त उप्परवाला या भक्त - व्यंग "

" वत्स , मै तुम्हारी भक्ति से अति प्रसन्न हुवा हूँ | " एक दिव्य आकाशवाणी हुई जिसे हम भगवान , खुदा कहते है " मांगो वत्स ..वरदान मांगो , आज जो भी मांगोगे मै मना नहीं करूँगा |", इस बात पर भक्त ने कहा " नहीं नहीं प्रभु ,आज मुझे कुछ नहीं चाहिए मै तो आपको कुछ देना चाहता हु और उसे आपको लेकर जाना है बस्स |" ऐसी विपरीत बात सुनकर उप्परवाले को बहुत ख़ुशी हुई की आज भी दुनियाँ में ऐसे भगत है जो मुझे कुछ देने के लिए तपस्या करते है ..मग़र मुझे किस बात की कमी है मै तो पालनहार हु ..मै खुद कुदरत हु , मै ही भाग्यविधाता हु , मै ही इश्वर हु , मै ही खुदा हु ..तो फिर ऐसी कौन सी चीज है या बात है जो मेरे पास नहीं है मग़र इस भक्त के पास है | "

" उप्परवाले को सोच में पड़ते देखकर भक्त ने फिर से कहा " प्रभु , चिंता ना करे मै आपको ऐसी वैसी कोई भी बात नहीं कहूँगा जिस से आपकी मुश्किले बढे ..मै तो आपका भक्त हु और आपका भक्त कभी किसी का बुरा सोच ही नहीं सकता ये भी तो एक सत्य है | " इस बात पर उप्पर वाले ने कहा " हाँ , मेरे भक्त हमेशा दूसरों का अच्छा ही सोचते है ..वो कभी किसी का बुरा सोच ही नहीं सकते, सदा के लिए जगत के कल्याण की बात ही करते है |" इस पर तुरंत ही भक्त ने कहा " तो प्रभु मुज पर यकीन रखे और सिर्फ आप हाँ कहे |" ..उस पर उप्परवाले ने कहा " हाँ तो ठीक है वत्स , अब बोलो मुझे क्या देना चाहते है ..बोलो मै क्या लेकर जाऊ ? "

" इस बात पर भक्त ने खुश होकर कुछ कहेना चाहा तो उप्परवाले ने बिच में ही कहा " वत्स , मग़र मेरी एक शर्त है ,की मुझे आपके द्वारा जो भी दिया जायेगा उस में पुरे जगत का कल्याण छुपा हो | " ... " प्रभु " भक्त ने कहा " पुरे जगत का तो कहे नहीं सकता मग़र , करोडो भारतवासीयों का कल्याण जरूर छुपा है ..ये यकीन के साथ कहे सकता हु |" ..." और हाँ ... " उप्परवाले ने कहा " अगर मुझे लगेगा की तुम्हारी बात गलत है तो फिर आप जो मुझे देनेवाले हो उसे मै वापस लौटा दूंगा | " ऐसी बात सुनकर भक्त ने फ़ौरन कहा " जी मुझे मंजूर है प्रभु | "

" तो फिर ठीक है बोलो मुझे क्या लेकर जाना है ? क्या देना चाहते हो मुझे ? उप्परवाले ने कहा ..उस पर भक्त हाथ जोड़कर बोला " प्रभु , आप बस्स , भारत देश के नेता जो भ्रष्ट हो ... उसे साथ लेकर जाइये | " ..उस पर फिर से आकाशवाणी हुई " वत्स , मै जिन्दा लोगों को अपने साथ नहीं लेकर जा सकता | " .. "नहीं प्रभु " भक्त ने कहा " सुना है की आपके द्वारा दिया गया वचन कभी खली नहीं जाता अब तो आपको इन सबको लेकर जाना ही पड़ेगा | " .." मग़र वत्स " ..." अगर मग़र कुछ नहीं प्रभु , अगर वाकई में आप मेरी भक्ति से प्रसन्न हुवे है तो फिर आपको मेरे मन की इच्छा को पूरी करनी ही पड़ेगी | ".... " ठीक है ठीक है वत्स , मै इनको लेकर जा रहा हु मग़र याद रहे मेरी शर्त | "..कहते बादलों को चीरते एक रस्सी आई और सभी भ्रष्ट नेताओं को बांधकर आकाश में जाते दिखाई दी , भक्त मारे खुसी के उछल रहा था ... |

" मग़र इस तरफ ..स्वर्ग लोक में कुछ अजीब ही घटना घटी .............. शेष अगले पार्ट में ....

इंतज़ार कीजिये इस कहानी के अगले पार्ट का ..और हँसने को रहिये तैयार ..क्यों की स्वर्ग में हो रहा है हंगामा ........ क्या उप्परवाला भी इन सभी भ्रष्ट नेताओं को संभाल सकेगा ? .... या फिर वहीँ पर भी होगी कुर्सी के लिए लड़ाई ? ..क्या करेंगे अब उप्परवाले ? ....... क्या भ्रष्ट नेताओं के जाने से भारत देश और करोडो भारतवासी सुखी हो जायेंगे ? ............... " कौन जीतेगा शर्त .... उप्परवाला या भक्त ? "
" इन सभी सवालों के जवाब के लिए पढ़ते रहिये और ...इंतज़ार कीजिये इस कड़ी के अगले पार्ट का क्यों की अगली कड़ी आपको इतना हँसाएगी ..इतना हँसाएगी की आप को निम्बू भी संतरा दिखाई देगा ...अरे दोस्त ...मेरा कहेना ये है की हँसते हँसते आँख से मारे खुसी के इतना पानी छलकेगा और आंसू की बूंद की वजह से निम्बू भी संतरा दिखाई देगा ...ही ही ही | "








9 comments:

  1. ये लो...अब इन्तजार करवा गये एकदम क्लाईमेक्स पर लाकर....चलिये...जल्दी आयें.

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  2. स्वतन्त्रता की 65वीं वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  3. भारत तो काफी खाली हो गया होगा? लेकिन अगली कड़ी का इन्‍तजार रहेगा।

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  4. हा हा...फिर से इंतज़ार करवा गए...
    हमारी संसद तो सूनी हो गयी होगी|
    ज़रा जल्दी कीजिये, अगली पोस्ट की बड़ी ज़ोरों से प्रतीक्षा है|

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  5. " गुरुदेव ,इंतज़ार में ही मजा है ... इस की अगली कड़ी का मजा इतना आएगा की ..आप बार बार आनेवाली कड़ी को पढ़ते रह जायेंगे ...और ये सब मैंने आप ही से तो सिखा है ...बस्स ,आशीर्वाद बनाये रखियेगा ...मगर गुरुदेव , आपने ये तो बताया ही नहीं की कौन जीतेगा शर्त ?

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  6. "अजित सर , ये खली होनेवाले भारत की हालत आप ही पढ़ना की क्या होती है और ये जानेवाले " नमूनों " की भी हालत आप पढ़ना की क्या होती है ? ..."

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  7. " सर , आपको भी ढेर सारी शुभकामनाये |"

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  8. " दिवास सर , ये संसद भवन जरूर सुना हो गया है ...मगर ये " नमूने " जहाँ भी जाते है वहां पर देखिये क्या करते है ? ...मजा आएगा सर ... पढ़ते रहिएगा ..और स्नेह बनाये रखियेगा | "

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  9. सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ शानदार प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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