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Tuesday, September 29, 2009

" यादें "



" पलक बंद करके छुपाकर देखा ,

दिल में हमने उसे दबाकर देखा ,


पलक खुली तो दिल में झाँककर देखा ,

साये की तरह उसे लिपटते देखा ,



बहते अश्को की धार में देखा ,

मुस्कुराते होठो की कहानी पर देखा ,



हर एक पल को देते देखा ,

इस पल को हमने मेहसूस करते देखा ,



दर्द में हमने खोते देखा ,

तो मर्हम बनके लगते देखा ,



पतझड़ के मौसम में पेडों की आँखों में देखा ,

टूटे मन्दिर ,मस्जिद के पत्थरो में देखा,



मेरा गुजरा हुवा " कल "मुझे कुछ देकर गया,

बेदीद होकर लौटते वक्त खोलकर देखा ,



खजाना था उसमे " यादों " से भरा ,

वो थी " दास, गम - -जिन्दगी " की अनमोल यादें | "








14 comments:

  1. क्या बात है, बहुत ही सुन्दर व उम्दा प्रस्तुति। आपका समर्पण देखते बनता है। बहुत खुब

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  2. Meree post" aankhen thak na jayen
    laut aao mere laaaaaaadlo" tatha ' jaa ud jare panchhee" zaroor padhen...
    aapkee kuchh pankiyon ne mujhe uskee yaad dila dee aur aankhen bhar aayee..
    padhte samay batana, wo kaunsee panktiyaan hongee jisne mere aalkh yaad dilaye...chaliye aapko is diwali meree likhi ek kitab bhent...gar pahchaan paye to!

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  3. पहले एक बार पलकें खोलकर इस रचना को पढ़ा ..फिर एक बार पलकें बन्द कर इस रचना को पढ़ा और समझ मे आया कि सार यही है "मेरा गुजरा हुवा कल मुझे कुछ देकर गया, " । यह रचना मनुष्य को अपने इतिहास से सबक लेने का सबक देती है । बधाई ।

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  4. गमे दिल की अनमोल यादों को कहाँ कहाँ नहीं देखा ...
    क्या खूब देखा ...बधाई ..!!

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  5. मेरा गुजरा हुवा " कल "मुझे कुछ देकर गया,

    बेदीद होकर लौटते वक्त खोलकर देखा ,



    खजाना था उसमे " यादों " से भरा
    बहुत सुन्दर यादें खजाना ही तो होती हैं जिन के सहारे हम पूरी ज़िन्दगी जी लेते हैं बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

    वो थी " दास, गम -ऐ -जिन्दगी " की अनमोल यादें | "

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  6. VAAH BAHOOT HI BEHATREEN LIKHA HAI.... KVI KA SAMVEDNSHEEL MAN KHUL KAR BAHAR AAY HAI AAJ ....

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  7. बहुत ही ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! इस शानदार रचना के लिए बधाई!

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  8. सुन्दर अभिव्यक्ति
    बहुत खुब
    बधाई!
    www.cmgupta.blogspot.com

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  9. मेरा गुजरा हुवा " कल "मुझे कुछ देकर गया,

    बेदीद होकर लौटते वक्त खोलकर देखा ,



    खजाना था उसमे " यादों " से भरा ,

    वो थी " दास, गम -ऐ -जिन्दगी " की अनमोल यादें | "


    Wah! kya baat hai in lines mein.......... dil ko chhoo gayin yeh panktiyan..........


    achcha laga.........


    bahut hi sunder abhivyakti hai.........

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  10. देख लिया है छुपा के सब कुछ दिल में जैसी याद।
    भाव तो अच्छे पर सुधार की करता हूँ फरियाद।।

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  11. "याद" गार रचना

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  12. " aap sabhi ka mera hosala badhane ke liye bahut bahut aabhar "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    http://hindimasti4u.blogspot.com

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  13. यादें याद रहती है
    बाकि कुछ नहीं रहता है
    सपनों में बसी यादों का
    अनमोल खजाना होता है

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आओ रायता फैलाते है

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