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Sunday, September 4, 2011

उल्टा चश्मा, बोले तो उल्टा चश्मा क्या ?

उल्टा चश्मा

हँसते रहो हँसाते रहो ..जिन्दगी का क्या भरोषा कब डिब्बी बंद कर दे.. पता नहीं ये जिन्दगी का खटारा कब तक चले आज कल तो पेट्रोल के दाम से लेकर सरकार के दाम भी बढ़ गए है ..यहाँ बैंक की कमी थी जो विदेश में धन रखने लगे है ..सत्ता में है तब तक भोंपू बजाते ही रहेंगे की हम चोर नहीं ..ये जिस चश्मे से आम आदमी को देखते है वही चश्मे से हम आज उनको यहाँ पर से देखेंगे ..याने "उल्टा चश्मा"
" व्यंग: खाते है हमारी और बजाते है सरकार की " पढ़िए इस पोस्ट को ..आपकी हसी भी रुकेगी नहीं


" पढ़कर बताना ये पोस्ट ... आप भी कहेंगे ... वाह ! ..मग़र कहेंगे सिर्फ इशारों में ..क्यु की आपकी हसी रुके तो बोलोगे ना ..ही ही ही .....|"

" मेरे इस नए ब्लॉग "उल्टा चश्मा" पर आप सब का स्वागत है |"










2 comments:

  1. सर व्यंग तो बहुत अच्छा था किन्तु दिल पर चोट कर गया| बड़ी गंभीर समस्या को आपने व्यंग के रूप में प्रस्तुत किया| शानदार रहा...
    सच में सलाम ऐसे मैली व फटी धोती वाले रामलाल को|

    आपका नया ब्लॉग तो बहुत अच्छा है किन्तु इसमें कमेन्ट ऑप्शन नही है|

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  2. uahee kathaa hai har dhan ke beemaar kee kyaa baat hai khub likhaa khaate hain --------thanks

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