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Friday, April 23, 2010

" दर्द और मुस्कुराहट "


"लोग कहते है ,


"दर्द" में भी तुम कैसे "मुस्कुराते" हो ?


मैंने कहा ,


ये "दर्द" से ही पुछो


"मुस्कुराना "मैंने "दर्द" से ही सिखा है

17 comments:

  1. छोटी है .... मगर सन्देश भरी है.... बहुत अच्छी लगी यह बोध कविता...

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  2. वाह .. क्‍या बात है !!

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  3. बहुत खूब
    लाजवाब

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  4. दर्द से ही सिखा मुस्कुराना ...
    दर्द सच ही सिखा देता है मुस्कुराना ...!!

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  5. क्या बात है, बहुत खूब!!

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  6. dard ka jankar hee muskura sakta hai. jo rona nahi janta wah smile bhee nahi kar sakta.narayan narayan

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  7. kya baat hai ...
    bahut khub...
    yun hi likhte rahein..
    regards
    http://i555.blogspot.com/

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  8. बहुत गहरी बात, बधाई।

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  9. kam shabdon me bahut hi gahri baat...

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  10. बहुत ही गहरे भाव के साथ लाजवाब प्रस्तुती!

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  11. अरे वाह!! चंद शब्दों में ही कितना कुछ कह दिया आपने.

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  12. bahot hi archi bat likhi gai he bhai.

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  13. वाह....
    दर्द जब हद से गुजार जाये तो दवा हो जाये ......

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  14. मुस्कुराना "मैंने "दर्द" से ही सिखा है

    वाह !!!!!!!!! क्या बात है.....बहुत सुन्दर

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  15. Jheysey ,har bhukh khaney ka maza theyti hai-GIRISH JUYAL

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  16. SAHI HAI DARD JAB BADH JAATA HAI TO DARD NAHI RAHTA ...

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आओ रायता फैलाते है

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