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Monday, June 29, 2009

हे भगवान !

"कभी कभी मुझे भी दर्द होता है ...लोग अक्सर रोते है तो दुनिया वाले कहते है की इसने बहुत ही गहरा दर्द महसूस किया होगा लेकिन कुछ लोगो को रोने के लिए बारिश के मौसम का इंतज़ार करना पड़ता है ..!ताकि उनके आंसू ये जालिम दुनियावाले देख जाये और उसमे भी ये कम्बखत बारिश आने का नाम नही लेती |"




" दर्द को जब भी हमने दबाना चाहा दर्द ने हम पर अपना सिकंजा मजबूत ही किया था ,यकीं की दुनिया अब हमें मानो दूर लग रही थी,कही से कुछ भी सहारा नजर नही रहा था ....की अचानक बादल जोरोसे गरजने लगे मानो वो हमसे कुछ कहते हो ...बिजली चमकने लगी थी मानो ....मानो की भगवान किसको कितना देना है किसको नही उसका हिसाब काले काले बादल पर कर रहे हो |मै और मेरा परिवार चुपचाप बैठे थे यही सोचते की क्या सच्चाई की जित होती है ? तभी बादल फ़िर से गरज उठे और एक आवाज़ आई " मेरे बन्दे जो सच्चाई को गले लगाता है उसे मै भी गले से लगाता हु ,अपने दिल में झांककर देख मै तेरे दिल में ही बैठा हु " |"




" बहार आकर मैंने देखा तो जोरो की बारिश हो रही थी ..आसमान भी आज मानो खुश लग रहा था ,हम सबके चहरे पे खुसी साफ छलक रही थी क्यों की अब मेरे बच्चो को पिने का पानी मिलेगा.... पिछले दिन से घर में एक बूंद भी नही था पानी ...सच में मैंने सच्चे दिल से भगवान को पुकारा था की " he bhagwan "

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