Monday, July 22, 2013

कानून क्या है ? ... एक सड़ा हुवा अंडा

                         " कानून जिसे हम सिस्टम कहते है ... मगर इस सिस्टम को क्या आप जानते है ? आज कल जो भी आता है इस सिस्टम का डर दिखा रहा है मगर दरअसल मे हमारे देश का सिस्टम बोले तो फुल्टू सड़ियल सिस्टम है ...आपने मर्डर किया है ...आपको डर लगेगा ..... आपने किसी की जेब काटी है ...सिस्टम के डंडे पड़ेंगे ..... आओ तो जानते है इस मुशकेली मे से कैसे बाहर नीकल सकते हम ...तरीका एक दम आसान है भाई ..... बहुत से लोग जानते भी होंगे ओर जो नहीं जानते है वो नीचे दिया उदाहरण पढ़ ले सब जान जाएंगे |"

* ये पूरा जरूर पढ़िये ..फिर आप भी कहेंगे की हाँ ,यही है हमारा सिस्टम
                " एक आदमी था " दिनकर शर्मा " जो खाना खाने एक फाइव स्टार होटल मे जाता है ...उसके पास होटल का वेटर आकर बड़े प्यार से खाने का ऑर्डर लेता है ओर वो भाई साहब ... अपने दिनकर शर्मा जी खाने का जमकर ऑर्डर देते है ... खाने के बाद आइसक्रीम वगैरा जमकर खाते है ..अब तक तो सब सही चल रहा था मगर तकलीफ यहाँ से शुरू होती है जब वेटर दिनकर बाबू के हाथ मे बिल थमा देता है ... जो की पूरा 3000 हजार रुपये का था | "

* 3000 के सामने 100 ?
                            " दिनकर बाबू ने जेब मे हाथ डाला तो सिर्फ 100 रुपये ही निकले ... अब क्या किया जाए ... उन्होने वेटर से कहा की भाई मेरे पास पैसे नहीं है .... अब फाइव स्टार होटल थी तो वेटर ने अपने मेनेजर को बुलाया ...मेनेजर ने आते ही कहा "सर, आपका बिल 100 रुपये नहीं बल्कि पूरे 3000 रुपयो का है " इस पर दिनकर बाबू ने कहा " जी, वो तो मै भी जानता हु पर मेरी जेब मे इस वक़्त 100 रुपये ही है "...

* सिस्टम ( पुलीस ) आई पार्सल लेकर चली गई 
                             "अब इतनी बड़ी होटल थी तो वहाँ पर हाथापाई तो नहीं की जा सकती है इस लिए होटल के मेनेजर ने इस देश की असली सिस्टम याने जिसे हम पुलीस (कानून ) कहते है उसे बुलाया ओर सारी घटना पुलीस ( कानून ) के सामने रख दी ...तो सिस्टम याने कानून को गुस्सा आया ओर उसने दिनकर के गिरेबान पर हाथ डाला ओर अपने साथ आए दूसरे कानून के रखवालों से कहा की इसे उठाकर जीप मे फेंको ....थाने चलकर इसका खाना हजम करवाते है " ...मेनेजर ने कानून के रखवाले याने उस पुलीस को उस सिस्टम को धन्यवाद कहा ओर अपनी होटल से मस्त खाना पार्सल करवा भी दिया |"

* दोबारा मत करना ... 100 रुपये का कमाल
                            " बाहर नीकलते ही सिस्टम दिनकर के पास गया जो की कानून की जीप मे बैठा था ...तभी दिनकर के दिमाग की बत्ती जली उसने अपनी जेब मे हाथ डाला ओर जेब मे पड़े 100 रुपये इस देश के सिस्टम के हाथ मे थमा दिये ...100 रुपये देखकर सिस्टम के चहेरे पर मुस्कान छा गई ...100 रुपये सिस्टम ने अपनी जेब मे रखे ओर कहा " चल अब दोबारा ऐसी गलती मत करना ...आगे के चौराहे पर तुझे उतार देता हु |"

                            " ये सच है दोस्तो ...ओर यही हमारा सिस्टम है तभी तो इस देश मे सरेआम कत्ल से लेकर गुंडागर्दी बढ़ रही है ....औरते बाहर नीकलने से डर रही है ....क्यू की आजकल हर अपराधी इस देश के सिस्टम को ..... पुलिश को अपनी जेब मे रखता है ...ओर वक़्त पड़ने पर जैसे घर के पालतू कुत्ते को वो बोटी डालता है वैसा ही समजकर वो इनको रिश्वत देकर छूट जाता है ..."

क्यू की यही हमारा सिस्टम है ...चाहे चौराहे पर खड़े RTO हो या फिर पुलीस जो फालतू ओर झूठा बोर्ड लगाकर घूमती है की " जनता की सेवा मे " ...मगर क्या वो सच मे जनता की सेवा मे है ? ... 

                           " न्याय का ये हथोड़ा महज 100 रुपये मे भी बिक जाता है ...... तो फिर अपराधियो का सच जनता के सामने कैसे आएगा ?"

ओर ऐसा इसलीये हो रहा है क्यू की हम सो रहे है 
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