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Tuesday, March 20, 2012

क्यु की ? सिस्टम जो मेरे हाथ में है


वो हमारे सीतम को भूल जाते है


और हम उन्हें रोज मारते है ,


उनकी आदत है भूलने की ,


हमारी आदत है मारने की ,


५ साल में हम एक बार मांगते है ,


और वो ५ साल तक मांगते है ,


तुलसी, वो लोन लेने रोज नयी बेंक ढूँढते है ,


हम पैसे रखने रोज नयी बैंक ढूँढते है ,


वो मुझे मारने के लिए जरिया बनाते है कानून को


मग़र रोज उसे ही मारता है कानून ,


मै जब चाहे किसे भी फंसा सकता हु कानून के दायरे में ,


और मै सिर्फ ५ साल में एक बार फंसता हु जनता के दायरे में ,


मै फिर नए वादे करता हु ,


मग़र वो भूल जाता है ,


मेरा वादा सपनों की तरहा है ,


उनका मेरी तरफ का गुस्सा भी तो सपनों की तरहा है ,


तुलसी, ना मेरा वादा सच में परिवर्तित होता है ,


ना ही उनका कोई आन्दोलन सच में परिवर्तित होता है ,


भ्रष्ट हु मै , मुझे कोई हरा नहीं सकता


क्यु की ?


सिस्टम जो मेरे हाथ में है ....................



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3 comments:

  1. गजब के ताल - मेल और जनता बेक़सूर भला करे क्या ?

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आओ रायता फैलाते है

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