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Wednesday, April 18, 2012

मरेगा साला ( व्यंग ) ..मग़र कौन ?

" ज्यादा मचमच किया ना तो "ठोकपाल" लागु कर देंगे क्या ? " मानो ये आवाज़ संसद भवन से आ रही है " क्या करेगा रे तु "जन लोकपाल" का ? अबे तु आम आदमी है ,आम आदमी की तरह रहेना सिख ले वर्ना पता है ना हमारे साथ टकरानेवाले का अंजाम क्या होता है ? ....वो डंडे भुल गया क्या ? ४ जून की काली रात ..क्या उखड लिया तुमने हमारा ,भाई बोलते है हम की हमसे मत टकराव जिस कानून के सहारे तु उछल रहा है ना वही कानून के पास हमारे काले धंधे के गुनाहों की ना जाने कितनी फाइल सड रही है मग़र वही कानून हमारा रक्षक बनकर हमें ही सलाम ठोकता है ...तु सुधर जा रे ..मत टकरा और ये सिस्टम बदलने के सपने देखना छोड़ दे ..क्या ? "

" भाई नेतागीरी तो हमारा खानदानी धंधा है और मै इस देश का अजर अमर नेता हु तेरा बेटा बड़ा होकर मजदूर ही बनेगा मग़र मेरा बेटा बड़ा होकर मंत्री ही बनेगा समजा अरे भाई यही तो है सिस्टम ,याद रख तु कुछ भी बोलेगा ना तो हमारा नहीं मग़र संसद भवन का और संविधान का अपमान होगा मग़र हम वही संसद भवन को अपना शयन कक्ष बनाकर बिंदास्त सोते है वो क्या है देश क इतना कुछ खाया है की नींद बहुत आती है ..अबे मै क्या कहे रहा हम समज रहा है ना तु ...तुम लोग खरबूजे की तरह हो और हम नेता छूरी की तरह है क्या ? ..नुकशान तेरा ही होगा ,हमारा क्या हम तो जेल में बैठकर भी चुनाव लड़ेंगे और तेरे जैसे मुर्ख लोग हमें जिताएंगे भी ...हम से मत टकरा वर्ना गरीबी की दल दल में इस तरह पिसुंगा की तेरा आटा भी नहीं निकलेगा ..बड़ा आया सिस्टम बदलनेवाला |"

" अबे जब मै वर्ल्ड बेंक के सामने तुम लोगो को सिर्फ २८ रुपये में अमीर बनाकर बेवकूफ बना सकता हु तो तु क्या चीज है रे ...कभी प्याज के नाम पर रुलाता हु तुम्हे तो कभी शक्कर के नाम पर ..तो कभी गेहू के नाम पर और बाकी रहे गया तो पेट्रोल और डीजल के दाम बढाकर तुम लोगो की जिन्दगी में आग लगा देता हु ..देख तेरा संविधान जिसके मुताबिक सब सत्ता तेरे हाथ में होते हुवे भी तु रो रहा है और मै तेरा संविधान के मुताबिक गुलाम होकर भी तुझ पर मनमानी कर रहा हु ..जा रे तु मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकता है |"

" तु सिर्फ हमें गलियाँ देते रहेना ...एक दिन मै तुम्हे जरूर गालियों के बदले गोलियां दूंगा ..देख कसाब ने सेंकडो को मारा फिर भी वो हमारे सहारे जिन्दा है और हम उसकी हर फरमाइश पूरी भी करते है मग़र तु अगर गलती से भी किसी एक को मारेगा ना तो डायरेक्ट फांशी , क्या ? जब जब तु चिल्लाएगा की सिस्टम को बदलो हम सब नेता भी चिल्लायेंगे की संविधान का अपमान हो रहा है ...अरे जब हम सुप्रीम कोर्ट की नहीं सुनते है तो तेरी क्या सुनेंगे रे ? ..तु हमारे घोटालो के बारे में चुप चाप अखबारों में पढता रहे ..मच मच नको ...क्यु की आज तक कानून के इतिहाश में कभी भी किसी भी भारतीय नेता को सजा नहीं हुई है ...हा हा हा |"

" पता है सिस्टम कब बदलेगी ...देख जब भी हमारे किसी भी दल के नेता पर कोई भी घोटाले का इल्जाम लगता है तो हम सब नेता मिलकर उसे बचा लेते है क्या ऐसी भाईचारा भरी भावना तुम्हारे अन्दर है ...नहीं ना ? फिर जा बच्चे आपस में लड़ते रहेना क्यु की तुम लोगो का आपस में लड़ना ही तो हमारी ताकत है ...जा ..जा जिस दिन तुम लोग हिन्दू ..मुसलमान मिटकर सिर्फ और सिर्फ सच्चे भारतीय बन जाओ उस दिन ये सिस्टम बदलने आना ..तब तक हमारे झूठे वादों को चिंगम की तरह साल तक चबाते रहो ..मग़र ये सिस्टम नहीं बदलेगा |"

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21 comments:

  1. आलेख की अंतिम पंक्तियाँ सटीक और विचारणीय हैं

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  2. KYA AAJ KA MUSALMAAN,EK SACHHA BHARTIYA HO SAKTA HAI,YA SACHHA RASHTRA BHAKT HO SAKTA HAI?KADAPI NAHI.

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    1. magar yahi jaroorat hai desh ko ki ek ho jaye aur anyay ke khilaf lade sir

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  3. EK AAM AADMI KO ,SADAK,BIJLI,PAANI,SWASTHYA,SHIKCHHA,PHONE BILL,BIJLI BILL,YE TAX,WO TAX,--SABHI CHIJO ME AISHA ULJHA KAR RAKHO KI DESH KE LIYE SOCHNE KA KISI KE PAAS SAMAY HI NA HO.SARKAR YAHI CHAHATI HAI.

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  4. मेटा लोग जानते हैं एकता की चाबी किसके पास है ... कुछ नहीं होने वाला ...

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    1. haan sir agar ham sab yahi soch kar baith jaye ki kuch nahi hoga to yakinan kuch nahi hoga

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  5. हिन्दू कुछ नहीं बन सकता हिन्दू भी नहीं.

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  6. bahut khub sir ji. kya sahi me sabhi system ki ek kar di hai. nice

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आओ रायता फैलाते है

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