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Monday, November 28, 2011

भारतीय आत्मा तुस्सी ग्रेट हो : चित्रगुप्त ( व्यंग )



" सभी आत्मा ये एक कतार में खड़ी थी और "चित्रगुप्त "का इंतज़ार हो रहा था ..यमराज और यमदूत के पास वक़्त नहीं था उतना काम उनके पास था और तभी " चित्रगुप्त जी " का आगमन हुवा और आगे की कार्यवाही शुरू हुई ..सारी दुनिया की आत्मा के किस्मत का फैसला होनेवाला था की किसको स्वर्ग मीले किसको नरक ? ..चित्रगुप्त जी ने शांति पूर्वक अपनी किस्मत वाली किताब निकाली और फैसला सुनाने लगे ज्यादातर आत्मा नरक में ही जा रही थी ..की अचानक यमदूत एक आत्मा को "पृथ्वी लोक" से लेकर आये .."ये आत्मा कहाँ से आई है " यमराज ने पुछा तो यमदूत ने यमराज को सलाम करके कहा " हुजुर ,ये आत्मा पृथ्वी लोक के भारत देश से आई है |"

" भारत का नाम सुनते ही एक विदेशी आत्मा जिसे स्वर्ग मिला था वो दौड़कर भारतीय आत्मा के पास आई और भारतीय आत्मा के पैर छुकर उसके हाथ को चूमने लगी ये देखकर "चित्रगुप्त " को गुस्सा आया और बोले " पैर भगवान के छुए जाते है और हाथ भी भगवान के चूमे जाते है और तुम्हारी इतनी हिम्मत की "देवलोक" में आकर भी एक आत्मा के हाथ चूम रहे हो जो भारत देश से आई है ..तुम्हारी इस हरकत की तुम्हे सजा जरूर मिलेगी और तुम्हारी सजा ये है की तुम अब स्वर्ग लोक में नहीं मग़र नरक में जाओ |"...उस पर वो विदेशी आत्मा हसने लगी और बोली "मुझे मंजूर है मग़र भारत देश से आई हर आत्मा का हाथ मै इसी तरह चूमता रहूँगा "..तो चित्रगुप्त ने उस बात का जब करना पूछा तो विदेशी आत्मा बोली " प्रभु ,मै स्विटज़रलेंड में रहेता था और मेरे जीवन में जितने भी मुझे सुख मीले है सब भारतवासियों की बदोलत ही मीले है ..इनको चुस्चुस्कर इनके नेता हमारे ही देश में जमा करते थे और उसी से हमारा देश चलता था और मै इनके सब्र को आज भी सलाम करता हु और करता रहूँगा क्यु की हर भारतवासी स्वित्ज़र्लेंद के लिए भगवान ही है |"

" चित्रगुप्त ये सुनकर हक्के बक्के रह गए और कहा " हर भारतवासी को अब से मुझे पूछे बिना ही नरक में डाल दो क्यु की अन्याय के खिलाफ चुप रहेना भी एक गुनाह ही है और भारत के नेता द्वारा जितने भी पाप हो रहे है उसके जिम्मेदार भी देशवासी ही है क्यु की वे अन्याय के खिलाफ बोलते ही नहीं है और नेता के पाप को बढ़ावा दे रहे है ...इस भारत की आत्मा को नरक में ले जाओ ....|" ...चित्रगुप्त की बात सुनकर भारत से आई आत्मा जोरो से हसने लगी ये देखकर
"चित्रगुप्त" बोले " मै तुम्हे नरक में भेज रहा हु और तुम हस रहे हो ? तुम्हे पता नहीं की नरक की यातना कितनी कठोर होती है हर चीज के लिए तुम्हे तडपना पड़ेगा |"

भारत से आई आत्मा उस बात पर हसने लगी और बोली "हमारे नेताओं के द्वारा जिन्दगी भर तो हर चीज के लिए तडपे ही है हम अब तो तड़पने की आदत सी हो गई है |"

उस पर " तुम्हे हर चीज के लिए लाइन में रखा जायेगा |"
भारत की आत्मा - " हा हा हा प्रभु ...वैसे भी जिन्दगी भर हम केरोसिन की लाइन में ही खड़े ही रहे है भारत में जहाँ भी जाओ लाइन ही लाइन है ..कोई बात नहीं हमें तो आदत सी हो गई है प्रभु | "

उस पर " तुम्हे भूखा रखा जायेगा |"
भारत की आत्मा " कोई बात नहीं प्रभु ,हमारी सरकार ने हमें उपवास करना और भूखे रहेना ...महेंगाई बढाकर सिखा ही दिया है | "

उस पर " तुम्हे आम आदमी समजा जायेगा ? "
भारत की आत्मा " हाहा ..प्रभु ये ख़िताब तो हमें हमारे देश की सरकार ने कब का दे दिया है |"

उस पर " तुम्हे सांस लेना भी मुस्किल हो जायेगा और तुम पर पाबन्दी डाली जाएगी |"
भारत की आत्मा "प्रभु ये भी हमारी सरकार कर चुकी है ..सभी पाबन्दी झेलकर ही आया हु और सरकार के कारनामे भी कुछ ऐसे थे की जनता सांस भी नहीं ले सकती थी |"

"भारत से आई आत्मा के जवाब सुनकर चित्रगुप्त को बहुत ही गुस्सा आया और उन्होंने यमदूत को आज्ञा दी की इस को डंडे घुमा घुमा कर मरे जाये ..यमदूत मोटा सा डंडा लेकर आगे आया और भारत की आत्मा पर जोरो से डंडे बरसाने लगा तो भी भारत की आत्मा मुस्कुरा रही थी ..चित्रगुप्त को ये देखकर हैरानी होने लगी आखिर कर चित्रगुप्त परेशान हो गए और "भगवान भोलेनाथ" को याद करने लगे की " प्रभु ये सब क्या हो रहा है ?" और तभी .... "

" भगवान भोलेनाथ " वहां पर हाजिर हुवे भारत की आत्मा ने भगवान भोलेनाथ को प्रणाम किया और धन्य हो गया ..तो चित्रगुप्त बोले "प्रभु ..मैंने कानून के मुताबिक इस पर सभी प्रयोग किये मग़र सभी प्रयोग नाकामयाब रहे है इस पर तो कोड़े का भी असर नहीं हो रहा है ..आखिर ये सब क्या है प्रभु ? "...भोलेनाथ ने भारत की आत्मा को कहा "अब तुम ही बताओ बेटे की तुम पर कोड़े का असर क्यु नहीं हुवा ? ..मुझे तो पता है मग़र चित्रगुप्त को पता नहीं है बेटे |"

" भारत की आत्मा ने भगवान भोले नाथ को प्रणाम किया और बोली " प्रभु चित्रगुप्त जी ,भारत की सरकार ने मुझे ये भी सिखाया है ...जब "रामलीला मैदान" में सरकार द्वारा डंडे बरसाए जा रहे थे तब मै भी वहां पर था और मैंने भी डंडे खाए थे ...सरकारी डंडे खाखाकर आदत पड़ गई है ...वो देश की सरकार के डंडे थे और आपके द्वारा बरसाए गए डंडे पुरे विश्व की सरकार के थे फर्क क्या पड़ा सरकार तो है ही ...अरे मै नरक से तो आया हु ..भारत के नेता ने भारत देश को नरक ही बना डाला है ..फिर भला मै आपके द्वारा नरक में दी जानेवाली सजा से क्यु डरु ...अब तो आदत सी हो गई है नरक में रहने की |"

" भगवान भोलेनाथ बहुत ही खुश हुवे भारत से आई आत्मा की सब्र की ताकत पर और उन्होंने भारत से आई आत्मा को आशीर्वाद देकर कहा की " जाओ बेटे मै तुम्हे स्वर्ग लोक प्रदान करता हु ..और ये वादा भी करता हु | "...और चित्रगुप्त की और देखकर भगवान भोलेनाथ बोले " चित्रगुप्त ,देखा मेरे भारत देश में रहनेवालो की सब्र की ताकत को ..और ये मेरी आज्ञा है की भारत देश से जीतनी भी आत्मा ये आये उसका पाप पुन्य ना देखा जाये और उन्हें स्वर्ग ही प्रदान किया जाये ..क्यु की भारतवासी को भारत देश की सरकार नरक की सजा दे चुकी होती है क्यु की भारत देश में जीना याने नरक में जीने जैसा ही है | "इतना कहेकर भगवन अदर्शय हो गए |"

" भारत से आई आत्मा अपनी जिंदगी में आज पहली बार मुस्कुरा रही थी और चित्रगुप्त बोल उठे " भारतीय आत्मा तुस्सी ग्रेट हो |"

नोट : यहाँ पर प्रस्तुत पोस्ट को केवल हास्य के रूप में ही ले यदि किसी के ह्रदय को किसी भी सब्द से ठेस पहुंचती है तो कृपया मुझे बताये क्यु की ये पोस्ट मैंने केवल आज के हालत पर मनोरंजन के रूप में ही लिखी है |"

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शुक्रिया गूगल

बोली लगाओ देश बिक रहा है : जियो मेरे लाल


" देश के टुकड़े करने पर तुले है हमारे नेता और आप कहते हो सब्र करो ..कोई देश वासी को "भिखारी" कहेता है तो कोई "आम आदमी " फिर चाहे किसी भी प्रांत के लोगो को भिखारी कहा जाए मगर दर्द तो हर एक भारतवासी के दिल मे होता है क्यू की एक भाई कभी दूसरे भाई को भिखारी कहे नहीं सकता और न ही उसकी ऐसी हालत देख सकता है मगर ...एक नेता कहेता है की भिखारी है तो हमारे देश का दुर्भाग्य देखो की हजारो बुद्धिजीवी लोग उसकी बेवकूफी भरी बात को समर्थन देते है ..यही बुद्धिजीवी लोगो की वजह से आज देश के ये हाल है की हम आज जहां भी जाए फिर चाहे वो "केरोसिन की लाइन" हो या फिर "पंचायत मे दाखला" निकाल ने के लिए लाइन हो ...बस्स खड़े ही रहते है और हमारे द्वारा चुने ये नेता हमे ही लूट कर मजे करते है ..वो हमे सारे आम पीट सकते है मगर हम उन्हे हाथ भी नहीं लगा सकते है ...क्यू भाई ? "

" चुनकर दिया था हमने उनको ताकि वो हमारे काम करे और नेकी से देश को चलाये मगर इनकी नेकी रंग लायी और "स्विट्जरलेंड " को मजबूत कर दिया फिर भी ये आदरणीय और माननीय कहेलाते है ..क्या अजीब तमाशा है ? तुम मरते हो तो मारो मगर हमारे और हमारी सरकार ने किए अन्य और भ्रस्ताचर के खिलाफ बोलने का आपको अधिकार नहीं है अगर बोलेंगे तो आपको बीच बाजार मे या फिर रामलीला जैसे मैदान मे या फिर फूलपुर जैसे मैदान मे सरा जाहेर पीटा जाएगा और आप हमारा कुछ बिगड़ भी नहीं सकोगे सायद ऐसा ही कहेना है ये सरकार का और हमारे देश के बुद्धिजीवी वर्ग का, हमारे बच्चे भूख मे तड़पे और विदेशो मे निर्यात ..|"

" जो बच्चा अपनी खुद की चड्डी भी ठीक से नहीं पहेन सकता है आज वो बच्चे को भी देश के हालात पता है और कहेता है ये सरकार जाए तो अच्छा है मगर हमारे बुद्धिजीवी वर्ग को ये मानना आज भी पसंद नहीं है ये सरकार आज भी चिदम्बरम जैसे को बचा रही है ..रामलीला मैदान मे लाठी चरग करवाने वाले को भी बचा रही है ...फूलपुर मे बड़े बड़े नेता द्वारा युवको की पिटाई करनेवाले भी बचा रही है ..मै कहेता हु की क्या कर लिया हमारे देश के बुद्धिजीवी वर्ग ने भाई ... आज देश मे भूख मारी बढ़ रही है ,महेंगाइ बढ़ रही है ,सरासर कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है ..काले धन को वापस लाने का कोई नाम नहीं ...जनलोकपाल को भी ये सरकार ..ऐसे ही हवा मे उड़ा देगी ...करोड़ो के भ्रस्ताचर के बावजूद भी पढे लिखे और समजदार लोग आज भी ऐसी सरकार को सही करार क्यू देते है भाई ...|"

" रही बात मेरे मुस्लिम भाई की तो उनको भी ये बता दु की ..राजस्थान मे यही सरकार थी ना जिनहोने सजदे मे रहे लोगो को भी नहीं छोड़ा था और यहाँ तक की मीडिया मे भी कुछ नहीं आने दिया था ..वो कत्ले आम पर नहीं है कुछ कहेना इस सरकार को ..? ..तमाशा बनाकर रख दिया है देश को ..हम जैसे बुद्धिजीवी लोगो ने ही ...आज भी देश मे करोड़ो गरीब परिवार है जिनको एक वक़्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है कौन है इनका जिम्मेदार ..सरकार या फिर हम जैसे पढे लिखे लोग ?...बस्स एक नेता कहेता है और हम निकाल पड़ते है एक दूसरे को काटने को ..नुकसान किसका है ? हमारा ही ना ? यही मजबूरी का फायदा उठा रही है ये सरकार और पीश रही है हमे ही महेंगाइ की चक्की मे |"

" बात ये नहीं की तू हिन्दू मै मुसलमान ..बात यहाँ देश हीत की हो रही है मुझे पता है यहाँ पर भी कुछ बुद्धिजीवी लोग आएंगे और मुझे सलाह देंगे ..क्यू की सायद इसिकों भारत कहते है ..धर्म को राजनीति मे जो भी पक्ष लाये उसे सबक अगर हम नहीं सिखाएँगे तो आनेवाला समय यही होगा की हम गुलाम बनते ही जाएंगे ...आज है उस से भी ज्यादा ..लड़ो भाई और लड़ो ..आपके लड़ने से देश के हरामि नेताओ को अच्छा खाशा फायदा जो हो रहा है ..लगे रहो ..और चिल्लाते रहो ..महेंगाइ मार गयी की तरहा ...|"

" मैंने 2009 मे एक पोस्ट लिखी थी आप पढ़ना ..जरूर जो यहाँ पर हे ..इसे क्लिक करना
जिसका टाइटल था : भारत देश की लीलामी चालू है क्या आपको बोली लगानी है

इस पोस्ट को जरूर पढ़िएगा ..अगर आप इस देश से करते हे प्यार

" सुना है विदेशी कंपनिया भी आ रही है रिटेल बाजार मे ...ठीक है भाई पहले किशान आत्महत्या करते थे अब व्यापारी भी आत्महत्या करेंगे ...मगर फिर भी हम कुछ भी नहीं कहेंगे भले ही ये शुरुवात हो गयी हो देश बेचने की मगर हम कुछ भी नहीं कहेंगे ..क्यू की बुद्धिजीवी लोगो को सायद पसंद भी ना आए हमारा बोलना ..जय हो ...जय हो |"

सुक्रिया गूगल

Thursday, November 24, 2011

"हेलमेट दिला दो सोनिया अम्मा "- व्यंग


"हेलमेट दिला दो "सोनिया अम्मा " ..हमारी मांगे पुरी करो ..पुरी करो " एक महा मोर्चा १० जनपथ की और बढ़ रहा था ..सबके हाथ में बड़े बड़े बेनर थे जिन पर लिखा हुवा था " अम्मा मदद करो "..मोर्चा जोरो से नारे लगाते हुवे आगे बढ़ रहा था ..सबसे आगे शरद पवार थे जो की देश में फैली महेंगाई के असली नायक थे "

" हेलमेट नहीं दोगे तो हम काम नहीं करेंगे, नहीं करेंगे " नारों के साथ आगे बढ़ता हुवा मोर्चा १० जनपथ पर पहुंचा ..तो प्रणव मुखर्जी ने मोर्चे को रोका और कहा " ये फिजूल की मांग लेकर मोर्चे के साथ यहाँ आते तुम्हे शर्म नहीं आती है ..इस से कांग्रेस पार्टी की कितनी बदनामी होगी वो पता है ..तुम लोगो की इस हरकत से हम लोग किसी को मुहं नहीं दिखा सकेंगे क्या सोचेंगे लोग ..."..." रहने दे ..तेरा भाषण ये दिख रहा है मेरा गाल ..अब तक हरविंदर की उन्गलियों के निशान मौजूद है तो क्या मै इस निशान के साथ सबको मुहं दिखा सकूँगा ? चल बाजु में हट " कहेकर मोर्चा सोनिया जी के घर में लेकर पहुंचे शरद पवार "

"ए माई..."सोनिया को देखकर ही शरद पवार रो पड़े " बहुत जोरो से खींचकर थप्पड़ मारा है ..माई ..वो तो अच्छा हुवा मै पहले वाश रूम में जाकर बाहर निकला था ..ये देखो मै मेरे गाल पर अभी भी पांचो उंगली के निशान मौजूद है मै कितने आराम से देश को महेंगाई की चक्की में पिछले कई सालो से पिस रहा था मग़र मुझे पता नहीं था की यही महेंगाई का आटा खा खाकर इस देश का नौजवान मेरे ही गालो पर आपके कांग्रेस पार्टी का निशान बनाएगा जब की मै तो "एन सी पी" का सुप्रीमो हु मग़र लोग तो मेरे गालो पर पंजा देखकर यही कहेंगे की ये प्रचार तो कांग्रेस का करता है "..."चिंता मत करो लोग कहे तो भले कहे मग़र तुम्हारे गालो पर पंजा देखकर मुझे फक्र हो रहा है की तुम वाकई में कांग्रेस पार्टी के वफादार मंत्री हो जो अपने गालो पर भी निशान बनाकर घूमता है " सोनिया ने बड़े शांति पूर्वक जवाब दिया

" नहीं माई हमे एक हेलमेट और रग्बी की टीम जैसे कपडे नहीं मिलते है तब तक हम संसद भवन में नहीं आयेंगे और ना ही हम कोई काम करेंगे .."शरद पवार के इस सुर में सभी नेता ने सुर मिलाया ".."काम ...हा हा हा ..भला हमने कभी कोई काम किया है पिछले ६५ साल का इतिहास और खासकर पिछले १० साल का इतिहास भी तो गवाह है की हमने इस देश को लुटने के सिवा कभी कोई काम नहीं किया है और तुम किस काम की बात करते हो ?..और भला रग्बी की टीम जैसे कपडे और हेलमेट क्यु चाहिए आप सबको ?..." माई , हम ने काम ही ऐसे किये है की जनता अब हमें दौड़ा दौड़ा कर मारेगी ही ..पहले जुते फेंकती थी ...फिर जुते मारती थी ...मग़र अब तो जनता ने भी तरक्की कर ली है ...अब सीधा फैसला ओन स्पोट और गालो पर हमारे चुनाव चिन्ह पंजे का निशान ".."हम्म "सोनिया बोली " ठीक है माई कुछ सोचती हु इस बारे में मुझे आपकी बात में सच्चाइ नजर आ रही है क्यु की आज तक जनता को हमने हर मौके पर मारा है और जनता मार खाती भी रही है मग़र हम मार खा ही नहीं सकेंगे हमें अपनी सुरक्षा के बारे में सोचना पड़ेगा ही "कहेकर सोनिया एक कमरे में चली गई

" शरद भाई बहुत जोरो से पड़ी थी क्या ? एक कांग्रेसी ने पुछा तो शरद पवार तिलमिला कर बोले " तुजे पड़ती तो पता चलता की आवाज के साथ साथ दर्द कैसा होता है "..."सही कहा पवार साहब ..मैंने इस थप्पड़ की गूंज सुनी थी ".."तो तुम भी वहां थे क्या ? "..."नहीं रे सारे "टी वी चैनल" पर बार बार यही तो आता था मै पहले भी बोला था जब आपने सक्कर के दाम बढ़ाये थे की रहने दो ..कही लोगो के दिल में कड़वाहट ज्यादा ना हो जाये मग़र आप मने नहीं ..नतीजा ..लो अब भुगतो ".......तभी सोनिया जी बाहर आई और अपने चश्मे को साफ़ करते करते बोली

"अभी अभी मुझे कलमाड़ी और राजा का फ़ोन आया था की ख़बरदार अगर किसी भी नेता को हेलमेट और रग्बी की टीम जैसे कपडे दिए तो ...अगर आप उनकी मांगे पुरी करेंगी तो हम "सी बी आई " को ये बता देंगे की घोटालो में आपका भी हाथ था ..इस लिए आप सभी से अनुरोध है की आप शांति पूर्वक और सावधानी से घर चले जाये और धैर्य बनाये रखे और हर मुस्केली का सामना हिम्मत से करे मै आपकी मांगे पुरी नहीं कर सकती हु "..ये सुनकर सभी नेता घर की और चल दिए एक नेता बोला " पवार कोई बात नहीं बिना हेलमेट का भी चला लेंगे ..धंधे में तो ऐसा चलता रहेता है भाई "..उस पर शरद पवार बड बडाये " काश तुजे पता चलता की थप्पड़ की मार कैसी होती है ..काश एक चांटा तुजे भी पड़ता तो पता चलता की दर्द क्या चीज है ?"

नोट : आज देश की हालात कुछ ऐसी ही है ..इसे सिर्फ हास्य के रूप में ले क्यु की हसना सेहत के लिए अच्छा होता है

इस पोस्ट की आइडिया याने हेलमेट अल्फाज़ " श्री अविनाश वाचस्पति " जी के फेसबुक स्टेटस पर लिखे अल्फाज़ हेलमेट से प्रेरित है ...सुक्रिया अविनाश वाचस्पति सर

चित्र गूगल बाबा से साभार
फोटो : राजेंद्र यादव जी की "तुलीका" का है

Saturday, November 19, 2011

नवमी पनोती क्या होती है ? :पनोती सिंह { व्यंग }


" पनोती ..ये पनोती क्या होती है ? " लल्लन ने पुछा तो अख़बार के पन्नो को समेटते हुवे चाचा चौधरी बोले " लल्लन ,ये पनोती को तु समज नहीं पायेगा |"..गधे को उसके बच्चे के साथ लाते हुवे पप्पु बोला "चाचा ,लल्लन के बस की बात नहीं है की पनोती को समज सके |"..."चुपकर पप्पु ,ये तो हम भी समजते है की पनोती याने शनिदेव का प्रकोप है |"...तो पप्पु हसने लगा और बोला " अबे लल्लन,शनिदेव की पनोती से भी ज्यादा खतरनाक पनोती पता है किसको कहते है ?"...उस पर लल्लन ने अपना सर हीलाकर आश्चर्यभरी निगाहों से ना कहा "हा हा हा ...तब पहले इस खतरनाक पनोती के बारे में जान ले दोस्त जिसे "नोव्वी पनोती" कहते है |"

"
लल्लन तु पप्पु की बातों पर ध्यान मत दे |" चाचा चौधरी ने कहा मग़र पप्पु लगातार पुछ रहा था की ये नोव्वी पनोती का मतलब क्या है ?क्यु की आज तक लल्लन के साथ साथ सबने येही सुना और जाना है की पनोती याने "साडासाती" ये ...नोव्वी पनोती को पहली बार सुना जो साडासाती से भी खतरनाक है |" ... "एय पप्पु बताना ...ये नोव्वी पनोती क्या होती है ? " .." तेरेको जानना है ना की नोव्वी पनोती क्या होती है ? तो फिर चल पहले इन गधो की पीठ पर लदा सामान उतारने में मेरी मदद कर |"..पप्पु बोला ..तो थोड़ी ही देर में गधो की पीठ पर लदा सामान खाली कर दिया लल्लन ने |"

" ये क्या है ? "पपू ने गधो की तरफ उंगली उठाकर कहा .."गधे " लल्लन बोला ..."सही कहा ,ये गधे है मग़र जानते हो जब किसी गधे का जन्म होता है तो गधे का बछड़ा बड़ा ही सुन्दर दीखता है लोग पहेचान नहीं पाते है की ये बछड़ा गधे का है या फिर घोड़े का मग़र जैसे जैसे उम्र बढती जाती है इस का असली रूप जनता के सामने जाता है और लोग उस से नफ़रत करते है |"..."तु मुझे गधे की बात मत सुना ,मुझे नोव्वी पनोती के बारे में बता |" लल्लन बोला ...." वही तो कहे रहा हु , जब ये सरकार को हमने चुन कर दिया तो ये सरकार गधे के बछड़े के माफिक खूबसूरत थी मग़र जैसे जैसे इस सरकार की उम्र बढती गई ये सरकार अपने असली रूप में ही गयी ..अब ध्यान से सून ..ये पनोती को और नोव्वी पनोती का मतलब |"

" गधे की लीद को साफ़ करते करते लल्लन बोला " सुन तो रहा हु |"... " जब से ये सरकार आई है देश को पनोती लग गयी है ..वो पनोती जो शनिदेव की साडेसाती से भी घातक है ..घोटाले ही घोटाले ,महेंगाई ही महेंगाई ..अरे शनि देव की साडेसाती किसी एक या दो राशी के लिए होती है ..मग़र ये साडेसाती पुरे १२० करोड़ लोगो के लिए है जो किसी को नहीं बक्षती क्यु की आपका गुनाह है की आप इस देश के नागरिक है और आपने इस सरकार को चुनकर दिया है ..गरीब के घरो में केरोसिन ना होने की वजह से चुला नहीं जलता है मग़र ये सरकार विजय माल्या जैसे उधोगपति के लिए चिंतित होती है ..गरीब ना जी सकता है और ना ही मर सकता है क्यु की मरने के बाद कफ़न भी महँगा जो हो गया है ..घोटाला करो और जेल में मोज करो ...अफज़ल ,कसाब जैसे आतंकी बनो और मोज करो क्यु की ये पनोती सरकार सिर्फ इन लोगो का ही सुनती है |".."हाँ ,अब समजा की पनोती याने ये सरकार और तु सही कहे रहा है मग़र ये बात हुई साडेसाती की ..अभी भी डेढ़ कम है "नौ" होने में ..नोव्वी पनोती |"

" मिडिया ..देश की आधी पनोती है ..जो लोगो को गुमराह कर रही है और सिर्फ सरकार का ही सुनती है जिसे गुजरात के मुख्यमंत्री " नरेन्द्र मोदी के टोपी ना पहनने में इंटेरेस्ट है मग़र देश में हो रहे करोडो के घोटाले में नहीं है और राजस्थान में हुवे मुस्लिम भाईयोँ के नर संहार को तो उन्होंने बखूबी दबा दिया ..और उसके फल स्वरुप इस आधी पनोती को साडेसाती सरकार ने पीटा और उनके कैमरे भी तोड़ दिए याद है ना "भावरीदेवी कांड " ..भला साडेसाती के आगे थोड़े ही आधी पनोती टिक पाती है | ".."साडे सात और आधी याने ये आठ ही हुवे ..नौ में एक कम है अभी भी |"

" अरे ओ २६ रुपये वाले अमीर इंसान ...साडे साती ये सरकार है और आधी पनोती ये मिडिया है तो तु इस देश के प्रधान मंत्री को क्यु भूल रहा है जो पूरी एक पनोती है ...जब से ये प्रधान मंत्री हुवा है देश में महेंगाई ..भूख ,गरीबी ,घोटाले ,आतंकी हमले ,स्विस बैंक चक्कर ,आतंकी कसाब की महेमानगति बढ़ी ही है फिर भी ये प्रामाणिक कहेलाता है ..हाँ ये प्रामाणिक है मग़र जनता के लिए नहीं मग़र उन घोटालेबाज मंत्री और सरकार के लिए क्यु की ये बोलता नहीं है और उनका ये मौन ही देश के लिए पूरी पनोती साबित हुवा है|"... तभी गधा चिल्लाया "देख ये गधा भी दिन में दो तिन बार चिल्लाता है मग़र ये अपने साल में कभी बोला ही नहीं है |"

" ओये पप्पु ,तुम ने तो कमाल कर दिया ....वाकई में ये नोव्वी पनोती खतरनाक है यार जो १२० करोड़ लोगो को एक साथ लपेट में ले लेती है |"..."ठीक है ठीक है ..मग़र याद रख इन गधो की लीद की वजह से सिर्फ ये थोड़ी सी जमीन और तेरे हाथ ख़राब हुवे है मग़र इस सरकार के भ्रस्टाचार से मेरा ..तुम्हारा ..हम सबका भविष्य भी ख़राब हुवा है ..इन गधो की लीद से भी ख़राब है देश में हुवा भ्रस्टाचार और ये .......नवमी पनोती |"



जल्द ही इस ब्लॉग में रही है पोस्ट :

" एक अजगर : सोनिया पावर |"



- चित्र गूगल से साभार