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Friday, July 8, 2011

" कालाधन , बेवकूफ और स्विस बैंक | "

 पढ़िए सोचिये और फिर कहिये |
        " सरकार की नीतियों पर आज कल बहुत सारे सवाल जहाँ खड़े हो रहे है वाही पर दिग्विजय सिंह और कपिल सिम्बल के निवेदन और कूट चाल पर भी विवाद खड़े हो रहे है ,कही कही लगता है की कांग्रेस सरकार देश के अहेम मुद्दे याने “जन लोकपाल” और “काला धन ” के मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है ..क्यों की सरकार ऐसा कोई भी कदम नहीं उठा रही है जिस से “कालाधन” वापस आये उल्टा बाबा रामदेव की संपत्ति और अन्ना हजारे जी पर सरकार छापे मार रही हैऔर सरकार के इस कदम से लोगों का ध्यान बाबा रामदेव की सम्पति और अन्ना हजारे जी की ट्रस्ट पर जाता है और काफी हद तक कांग्रेस लोगों का ध्यान बाबा रामदेव की सम्पति और अन्ना हजारे जी की ट्रस्ट पर लगाने में और देश के अहेम मुद्दे ” जन लोकपाल” और “काले धन ” को भुला ने में कामयाब भी हो रही है | ”
* कालाधन किसे कहेंगे आप ?
” देश की जनता को अँधेरे में रखकर ,देश की जनता के साथ विश्वासघात करके कोई भी सौदे में करोड़ों रुपयों का घोटाला करके जो पैसे मिलते है और पैसों को विदेशों की बैंक में जमा किया गया हो ..उन रुपयों को या फिर उन रुपयों को जो जनता सामने से मंदिर , मस्जिद ,दरगाह , साधु संत को दे रही है ..या फिर उन रुपयों को जो आयुर्वेदिक दवाये बाबा रामदेव के द्वारा बनायीं जाती है उसे जनता द्वारा ख़रीदा जाता है उन रुपयों को ?..अगर बाबा रामदेव के पैसों की और सत्य साईं बाबा के पैसों की जांच सरकार कर सकती है तो ..देश के करोड़ों लोगों को चूसकर हजारो करोड़ों के घोटाले से इक्कट्ठा किये और स्विस बैंक में जमा किये गए पैसों की सरकार क्यों जांच नहीं कर सकती है ..असली देश का काला धन तो स्विस बैंक के लोकरोँ में बंध है ..इस की जांच करो |”
* मंदिरों का पैसा कालाधन है
” कल अगर यही सरकार कहे की शिर्डी के मंदिर का और तिरुपति बालाजी के मंदिर का पैसा कालाधन है तो क्या आप मान लेंगे ? सरकार तो आज कल असली “काले धन के मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यही कर रही है और निशाना बना रही है धार्मिक स्थलों को …..जिसका हाल ही का एक नमूना है सत्य साईं बाबा का … सत्य साईं बाबा जिन्दा थे तो यही नेता वहां जाकर जुकते थे और आज यही नेता उनके कमरे से मिले धन को लेकर जांच करवा रहे है ..खुद के काले धन की जांच को लोगों के दिमाग से निकालने के लिए सरकार गिरती ही जा रही है | ”
* दो सवाल आप सब के लिए
१ ) क्या लोगों के द्वारा किसी मंदिर ,मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थल पर दिए गए पैसे को काला धन कहते है ?
२ ) देश की जनता को अँधेरे में रखकर जनता को चूसकर खरबों रुपये स्विस बैंक में पड़े है उसे कहेंगे आप ” काला धन ” ?
फैसला आपके हाथ में है अब | 


5 comments:

  1. इस सरकार का अंत काल आ गया है विनाश काले विपरीत बुद्धी

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  2. बहुत सही!
    अपना तो काला धन भी सभेद नजर आता है सबको!

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  3. काले धन को परिभाषित करने कि कोई आवशयकता नहीं रह गई अब तो..सब खुलेआम दिखता है...दोषी पर जब आरोप लगता है, तो वह बचने के लिए दूसरों को उस दोष में लिप्त बताता फिरता है और ऐसा प्रयास करता है कि दोष को परिभाषित करने की आवश्यकता आन पड़े...जानबूझ कर सच छुपाना व भ्रमित करना दोषियों के कुछ सामान्य गुण हैं....जनता सब जानती है और समय आने पर सबक सिखाएगी ...

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  4. मने सुना है की पिछले लोक सभा चुनाव में विदेशों से तकनीसियन बुलाए गए थे वोटिंग मशीन में गडबडी करने के लिए इस प्रकार ये काले धन का इस्तेमाल ह्काही भी कर सकते है और राज करते है.

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  5. वाह तुलसी भाई, क्या शानदार उत्तर दिया है आपने बुद्धुजिवियों को...इस जमात को बुद्धूजीवी ही कहा जाना चाहिए जो बाबा रामदेव के ट्रस्ट पर तो नज़र रखती है, लेकिन विदेशी बैंकों में सड़ रहा धन इन्हें नहीं दिखता...
    बेहतरीन प्रस्तुति...आभार...

    @blogtaknik
    हाँ आपने बिलकुल सही सुना है...दिल्ली के ही होटलों में उन्हें ठहराया गया था..

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