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Saturday, May 31, 2014

धारा 370 : कश्मीर का गुलाम हिंदुस्तान... जानो धारा 370

कौन कहेता है कश्मीरीयों पर अन्याय करता है भारत 
 धारा 370 को देखो जरा 
आज भी कश्मीर का बाप हिंदुस्तान 
सीर्फ  एक गुलाम नजर आ रहा है
 इस पोस्ट मे पढ़ीए 
* आइये जानते है धारा 370 को 
* कैसे बनी धारा 370 ? आइये जानते है धारा 370 की कहानी को
* धारा 370 में किए गए कुछ बदलाव
अब विस्तार से 
* भारत वीरोधी कानून धारा 370 को जानो 
                           ' धारा 370 भारत वीरोधी है क्यू की कश्मीर मे मरते है भारत के जवान और 370 के तहत कश्मीर पाकीस्तान का लग रहा है क्यू भाई जब भारत का हिस्सा है कश्मीर तो उस पर भारतीय कानून क्यू लागू नही होते है ? क्यू कश्मीर के नागरीको को दोहरी नागरीकता ? और अगर पाकिस्तानी आतंकवादी को हरत पर हमला करना है और भारत का नागरिकत्व चाहीये है तो वो कश्मीर की लड़की से शादी कर के भारतीय नागरीकत्व प्राप्त भी कर सकता है .... ये कैसा कानून भाई ?

           '  मरे तो भारतीय जवान ... मरे तो कश्मीरी पंडीत मगर जम्मू कश्मीर सलामत क्यू ? ना पंचायत है और ना ही भारत के उच्चतम न्यायालय के अधीकार क्या बात है ...अजीब सा है भारत वीरोधी धारा 370 '

कहते है भारत मे लोकतन्त्र है मगर क्या लोकतंत्र ऐसा होता है जहां उंच नीच का भेदभाव हो ? कश्मीर की हर सडको पर बहे वीर भारतीय जवानो के खून के साथ ये अन्याय है धारा 370 

आइये जानते है धारा 370 को
* दो झंडे ..... दो संवीधान

* जमु कश्मीर के लोगो के पास दोहरी नागरीकता होती है

* जम्मू कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है

* जम्मू कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है जब की भारत के अन्य राज्यो की विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है

* जम्मूकश्मीर के अंदर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्र प्रतीको का अपमान अपराध नही होता है

* भारत के उच्च नयायालय के आदेश जम्मू कश्मीर के अंदर मान्य नही होते है

* भारत की संसद जम्मू कश्मीर के संबंध मे अत्यंत सीमीत क्षेत्र मे कानून बना सकती है

* जम्मू कश्मीर की कोई महीला यदी भारत के कीसी अन्य राज्य के व्यक्ती से वीवाह कर ले तो उस महिला की जम्मू कश्मीर की नागरीकता समाप्त हो जाती है इस के वीपरीत यदी वो महिला पाकिस्तान के कीसी व्यक्ती से विवाह कर ले तो उस व्यक्ती को जम्मू कश्मीर के साथ साथ भारत की नागरीकता भी मील जाएगी

* धारा 370 की वजह से कश्मीर मे RTI लागू नही है और ना ही CAG और RTE लागू होता है ,यहाँ तक की भारत का कोई कानून लागू नही होता

* कश्मीर मे महिलाओ पर शरीया कानून लागू होता है

* कश्मीर मे पंचायत के अधीकर नही है

* कश्मीर मे चपरासी को 2500 रुपये मीलते है

* कश्मीर के अल्पसंख्यक (हिन्दू और शीख ) को 16% आरक्षण नही मीलता

* धारा 370 की वजह से पाकीस्तानीयों को भी भारतीय नागरीकता मील जाती है उसके लीये पाकीस्तानी पुरुष को केवल कश्मीरी लड़की से शादी करनी पड़ती है

* धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।

* इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती

* इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।

* 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।

* 1976 का शहरी भूमि क़ानून तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते

* भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती

* भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग २१ का अनुच्छेद ३७० जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है

* जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्य के नागरिक सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर सकते हैं.

* 370 के कारण जम्मू और कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती. इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है.

* धारा 370 की वजह से ही जम्मू कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिन्ह भी है. धारा 370 के तहत देश के सभी राज्यों में लागू होने वाला कानून यहां लागू नहीं होता है.

* कैसे बनी धारा 370 ? आइये जानते है धारा 370 की कहानी को
             " भारत आज़ाद हुवा मगर जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं था, ऐसे में जम्मू-कश्मीर के पास दो ही विकल्प थे या तो वह भारत में शामिल हो जाए या फिर पाकिस्तान का हिस्सा बने. जम्मू कश्मीर के राजा हरिसिंह का हिंदू होने के नाते भारत की ओर झुकाव था मगर वहां की जनता अधिकतर मुस्लिम थी जो पाक में शामिल होना चाहती थी मगर राजा हरिसिंह ने भारत में विलय करने का ऐलान किया और 'इंस्ट्रमेंट ऑफ एक्सेशन' नाम के दस्तावेज पर साइन किए, जिसका खाका मौजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला ने तैयार किया | '

                " इसके बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया और उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला को हरि सिंह और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जम्मू-कश्मीर का प्रधानमंत्री बना दिया. हालाकी 1965 तक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था.

* धारा 370 में किए गए कुछ बदलाव
हालांकि कुछ विरोध के कारण धारा 370 में कुछ बदलाव भी किए गए. जैसे सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री को बदलकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री कर दिया गया इसके अलावा पहले जम्मू-कश्मीर में देश के बाकी हिस्सों से जाने वाले लोगों को अपना पहचान पत्र साथ रखना जरूरी था, जिसका बाद में विरोध होने पर इस प्रावधान को भी हटा दिया गया.

* आखीर मे
        " कहते है भारत मे लोकतन्त्र है मगर क्या लोकतंत्र ऐसा होता है जहां उंच नीच का भेदभाव हो ? कश्मीर की हर सडको पर बहे वीर भारतीय जवानो के खून के साथ ये अन्याय है धारा 370  "

         " क्यू की जहां भारत के कानून को कोई स्थान नही वहाँ पर भारतीय जवान को क्या बली के बकरे के माफीक क्यू भेजा जा रहा है ? क्या भारत मे एक कानून नही होना चाहीये ? अगर कोई प्रदेश पर भारत का कानून लागू नही होता हो और उस प्रदेश पर भारतीय उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रपती भी अपना अंकुश नही रख सकते है तो हटाओ इस धारा 370 को "

        " जो कहते है की कश्मीरीयों पर अन्याय हो रहा है उन्हे ये कानून देखकर ऐसा कहने को जी करता है की 
 कौन कहेता है कश्मीरीयों पर अन्याय करता है भारत 
  धारा 370 को देखो जरा 
आज भी कश्मीर का बाप हिंदुस्तान 
सीर्फ  एक गुलाम नजर आ रहा है  "

पाठको आपका क्या कहेना है ?
धारा 370 हटानी चाहीये या नही ?

कुछ बाते यहाँ पढे

धारा 370 की कुछ खबर यहाँ है
दो संवीधान - दो झंडे
हिन्दू मंदीरों की कॉंग्रेस द्वारा लूट  
सोनिया गांधी की चोरी " THE RED SAARI " भारत मे प्रतिबंधीत कीताब 

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1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (01-06-2014) को "प्रखर और मुखर अभिव्यक्ति (चर्चा मंच 1630) पर भी है!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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