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Wednesday, April 6, 2011

मीडिया - कलम जहाँ बिकती है |

" क्या देश की चौथी जागीर मीडिया भी " आम आदमी " की दुश्मन है ? ..या ये "कलम की ताकत" भी भारत के राज नेताओं के हाथ  बीक गयी है ? कलम की ताकत से एक ज़माने में अच्छे अच्छे गुन्हेगार डरते थे आज वही कलम दिल्ही बैठे नेता के हाथ की कठपुतली बनती नजर आ रही है और बन रही है देश के करोडो " आम आदमी " के गुन्हेगारोँ की ताकत, क्यों की कलम को क्या लिखना और क्या केमेरा में कैद करना, ये आज आम आदमी के गुन्हेगार तय करते है |"

                   " अन्ना हजारे जी को आज उपवास पर नहीं बैठना पड़ता अगर मीडिया का काम सही और साफ़ सुथरा होता ,अगर मीडिया ध्यान देती इन भ्रस्ताचारीयों पर तो आज ये दिन नहीं आता और हर भ्रस्टाचारी जेल की हवा खाता होता बहुत से ऐसे राज्य भी होंगे जहाँ की मीडिया अन्ना हजारे जी के इस उपवास का कवरेज नहीं देती होगी या उनके पास इस समाचार के लिए जगह नहीं होगी ..|"

    " छोटी छोटी बात पर "स्टींग ऑपरेशन" करनेवाली हमारी चौथी जागीर मीडिया को देश में हो रहे करोडो के घोटाले के खिलाफ कभी कोई ऑपरेशन क्यों नहीं किया ? ..छोटी छोटी बात को बड़े ही धमाके से पेश करनेवाली मीडिया की नजर में देश में हो रहे करोडो के घोटाले और बड़े बड़े भ्रस्टाचार का महत्त्व क्यों नहीं है ? खरबों रुपयों की सहायता गरीबों के लिए भारत सरकार मंजुर करती है मगर ये सहायता कभी किसी गरीब तक क्यों नहीं पहुंचती, आखिर ये सहायता जाती कहाँ है ? मगर मीडिया ने कभी इस बात को महत्त्व नहीं दिया और न ही जानने की कोशिश  भी की
है | मीडियाभी भ्रष्ट नेताओं की चुंगल में फंसकर खुद भी खड़ा है भ्रस्टाचार के कीचड़ में |"

   " मीडिया में दिखाई जाती कोई भी रिपोर्ट को ले लो "

       " आधे घंटे के रिपोर्ट में आपको एडवरटाईस दिखाई जाती है १२ या १४ मिनट की  और बाकी में दिखाई जाती है रिपोर्ट अगर रिपोर्ट रस्ते या फिर गंगा नदी की गंदगी के उपर है ...फिर खडडा दिखाओ और रस्ते की चिंतनीय हालत पर अफ़सोस व्यक्त करो ...मगर कभी ये नहीं दिखाते की हमारी टीम ने इस के खिलाफ ये ऑपरेशन किया और इस सड़क को बनाते वक़्त हुवे भ्रस्टाचार को हम आपके सामने रख रहे है मगर बिना किसी गुनाहित व्यक्ति को उजागर करे ही कहते है अगले सनीचर को फिर मिलेंगे ... रिपोर्ट ऐसी होती है ? ..रिपोर्ट उसे कहते है जिसमे सच्चाई दिखाई जाये जनता को ...की ये सब कैसे हुवा और इस में इतना भ्रस्टाचार हुवा है जो इस तरह से हुवा है ..पुरे सबूतों के साथ मगर ये सब करेगा कौन ...?"

* येस बॉस  |

      " आज देश की सबसे बड़ी ताकत " चौथी जागीर " याने "मीडिया " , नेताओंके तलवे चाटती नजर आ रही है , और इन भ्रस्टाचारी नेताओं को "येस बॉस" कहेती नजर आ रही है ..कलम गुलाम बन चुकी है सायद इसी लिए ही भ्रस्टाचारी नेताओं के खिलाफ कोई स्टिंग ऑपरेशन नहीं हो रहा मगर किसी आम आदमी के खिलाफ हो रहा है ऐसे शस्त्र का इस्तेमाल .... सत्य का साथ देनेवाली मीडिया आज असत्य की गोद में जो जा बैठी है ..|"

* " मीडिया " के मालिक कौन कौन है इस बात का पता कभी लगाने की कोशिश करो और उन मालिक के रिलेटीव कौन कौन है इस बात का पता लगाओ ..दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा |"

         * ये भी मजबूर है |"

        " जहाँ खबर छापने के भी, और न छापने की भी ..ली जाती है कीमत , वर्त्तमान हालत को देखकर ऐसा साफ़ होता है की "कोठेवाली औरते" और "मीडिया" में फर्क नहीं है..दोनों ही पैसों के लिए नाचते नजर आते है ...माना की कोठेवाली की कोई न कोई मजबूरी होती है मगर मीडिया की क्या है मजबूरी  ? आखिर मीडिया मजबूर क्यु ?"

* देश के आम आदमीयों के सपनो को रोंद्कर ..भ्रस्टाचार भ्रस्टाचार खेलनेवाले मिनिस्टर की वाह वाह करती मीडिया ,देश के ऐसे गद्दार को बचाने में प्रमुख भुमिका निभा रही है सायद कलम से टपकनेवाली सच्चाई को देश के आम आदमी के गुन्हेगार के हाथो बेच दिया है ...अगर नहीं बेचा है तो फिर ये चुप्पी क्यों ?भ्रस्ताचार होता है तो कुछ दिन तक अख़बार और न्यूज़ की सुर्खियों में खबर रहेती है फिर उस खबर को भुला दिया जाता है ..इतने सरे भ्रस्टाचार होते आपने सुना होगा मगर कभी आपने ये सुना की मीडिया ने किसी एक घोटाले के खिलाफ कार्यवाही करके सच्चाई को जनता के सामने उजागर किया है , ..| सायद ये सुनना असंभव है क्यों की मीडिया को देश की और देश के करोडो आम आदमी के दर्द की कोई फ़िक्र नहीं है |" 

  " इन घोटालो में जो शामिल है उनकी तरफदारी और जय जयकार करती नजर आएगी मीडिया मगर इन नेता के द्वारा किये गए भ्रस्टाचार की जन्म कुंडली नहीं निकलेगी ... इस देश में अगर अमिताभ बच्चन को सर्दी  है तो न्यूज़ की सुर्खिया बनती है मगर इन नेताओं के भ्रस्टाचार की वजह से देश में कितने गरीब भूख से तड़पकर मरते है इस बात की इनको पड़ी नहीं |

 * तो फिर यही कहेंगे ना की आज के दौर में मीडिया याने मदारी { नेता } के हाथ का वो बंदर है जिसे नेता कहेता है " चल जम्बूरे नच के दिखा | " 

        
               " आज देश में चारो तरफ घोटाले ही घोटाले नजर आ रहे है, इस बात की  जिम्मेदार बहुत हद तक मीडिया ही है, जिसकी वजह से आज " श्री अन्ना हजारे जी " हमारे बच्चों के भविष्य के वास्ते "जंतर मंतर" पर उपवाश पर बैठे है | ये बिकाऊ मीडिया दर असल बंदर ( जम्बूरे ) से भी गयी गुजरी है ..कम से कम ये बंदर प्रभु श्री राम के काम तो आये थे ..इन मीडिया ने तो बंदर को भी शर्मा दिया |"
 
" इस के आगे पढ़े अगली पोस्ट में ...पढ़ना भूलना नहीं |"  
 

6 comments:

  1. बहुत खूब. सच्चाई और आइना..

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  2. बढिया....... तुलसीभाई ....बहुत ही बढिया । कुछ के लिए खासकर जो पत्रकारिता नहीं नौकरी कर रहे हैं उन बेचारों के लिए तो मानता हूं कि वे शायद किसी हद तक मजदूर हैं लेकिन जिन्होंने पत्रकारिता को पहले पेशा फ़िर धंधे का रुप दे दिया उनके लिए पूरे देश को नहीं वरन खुद पत्रकारिता को भी अफ़सोस ही होगा । कलम चलती रहे शुभकामनाएं

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  3. tulsi bhaai bahut khub apane to mere dil ki baat hi chhin li midiyaa ke baare me aapke vishleshn se me shmt hun lekin kuchh alg bhi hote hai jo ptrkaritaa ki izzt or aabru ko bchakar rkhe hue hain . akhtar khan akela kota rajasthan

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  4. बडी बेबाकी और साफ़गोई से लिखा है आपने…………सोचने को मजबूर करता है आपका आलेख्।

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  5. Sachhai bayaan ki hai ... kabhi kabhi lagta hai media aaj hai hi nahi .. bas lisi n lisi party ka mouth peace hi rah gaya hai ... aapka aakrosh nazar aata hai ..

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  6. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके.,
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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आओ रायता फैलाते है

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