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Sunday, July 26, 2009

क्या इसमे हमारी भलाई है....? या अपराधी की ?

"बड़ी मुस्किलो से हमारी पुलिश आंतकवादी,खुनी और डकैत को पकड़ती है मिडिया वाले पुलिश स्टेशन जाकर अपराधियों की तस्वीर लेकर अपने अखबार या टी.वी चानेल पर प्रदसित करते है ताकि लोगो को पता चले की "अपराधी "पकडे गए है और उनकी पहचान लोगो को हो सके "

" मगर तस्वीर या विडियो क्लिप में दिखाते है पुलिशवालो के साथ काली कपडे की टोपी से पुरा चहेरा ढका हुवा अपराधी नज़र आता है मगर यारो ....... ये जो आप देख रहे हो वो काली टोपी क्यों ? .....सायद यही वजह से मैं और तुम परेशां है ........क्यों की जब अपराधी जेल से छुटता है या फरार होता है बिल्कुल हमारे बगल में बैठकर वो फरार हो रहा है मगर हमने देखि है काली टोपी की तस्वीर,अपराधी का असली चहेरा नही इसी लिए हम कुछ नही कर सकते है ...कम्बखत ये काली टोपी ..."

"क्यों की इन अपराधियों का चहेरा पुलिश जानती है आम आदमी नही ...जनता नही जानती है अपराधी का असली चहेरा फिर कैसे उन्हें पकड़वाने में मदद कर सकती है जनता जरा सोचो आपके पास ही कोई जेल से छुटा या फरार अपराधी बैठा हो तो क्या आप उसे पहचान पाओगे ?...नही न ॥? "

" क्यों की आपने काली टोपी वाले अपराधी का सिर्फ़ अपराध पढ़ा था उसका चहेरा नही देखा था अखबार या टी.वी चानेल पर ...अपराध का पता है मगर अपराधी कौन है?.. कैसा है? उसका पता नही..सिर्फ़ और सिर्फ़ काली टोपी की तस्वीर हम तक पहुचती है ....अपराधी का असली चहेरा नही तो भला आप कैसे पहेचन पाओगे साथ में बैठे खुखर अपराधी को "

"कभी कभी अपराधी जेल से फरार होकर या छूटकर आम आदमी की भीड़ में सामिल होकर फ़िर नया अपराध करता है बिना dare ...और हम देखते रहते है ...अपराध करने के बाद जब उसकी तस्वीर मिडिया में आती है tab तक वो अपराधी राज्य की सीमा laandh चुका raheta है "

" अगर मिडिया में अपराधी की sacchi तस्वीर chape तो पुलिशवालो की mahenat पर इस तरह pani नही phirega ....क्या लगता है आपको ?

} हमे अपराधी का असली चहेरा दिखाना चाहिए ..या नही ?

२} क्या काली topiwali तस्वीर से आपको fayada है ? या nukasan

३} क्या काली टोपी की तस्वीर dekhaker आपके mann में sawal नही उठता की कौन है ये अपराधी ?"

" छोड़ो भी आज kaal तो पकडे गए अपराधी तो thik aantakwadiyon ke chehare भी dhake jate है "

" क्या आप मेरे साथ sahemat है की अपराधी का असली चहेरा samne आना चाहिए ....क्या ये काली टोपी अपराधी का bachav करती है ?.....चलो basssss फ़िर कभी .....फिर मिलेंगे ........."

"wada रहा फिर मिलेंगे हम और तुम बहुत जल्द "एक नए subject के साथ ...tab तक dosto

अलविदा ....

vandemataram


2 comments:

  1. जबतक अपराध साबित नही होता , हमारा क़ानून कहता है ,वो अपराधी नही होता ..! क्या तो करे पुलिस और क्या तो करे जनता ..!
    और तो और गर , पुलिस किसी वजहसे अपराधीने किए अपराधके तरीकेको सामने लाना नही चाहती ,तो medea अपनी कल्पनाशक्ती से पूरा modus operandi दिखा देती है ..ना करनेवाले , उस तरहसे गुनाह करनेके लिए उकसाए जाते हैं ...!

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  2. Just to complete Your interesting report, I invite You to see in my site a great collection of views of borders.
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    Best wishes from Italy!

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आओ रायता फैलाते है

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