:

Thursday, December 29, 2011

हार अन्ना हजारे की या आम आदमी की

इस बार अन्ना हजारे का अनशन विफल रहा, टीम अन्ना का कहना है की अन्ना हजारे की तबियत इसका कारण रही, विरोधी कह रहे हैं की अन्ना का सच जनता के सामने आ गया है लेकिन मै कहूँगा की ये हम सभी की उदासीनता है जो इस हार का
कारण बनी है और थोडा सा सरकार के कुटिल नेताओं की चलाकियां भी |

अन्ना हजारे ने अनशन तोड़ दिया और मुझे उनके अनशन के तोड़ने से कोई शिकायत नही है क्योंकि इस बार मै उनके अनशन मे साथ नहीं था अत: उनकी हार की नैतिक जिम्मेदारी थोड़ी सी मुझ पर भी है और अगर आपने पिछले ३ अनशनो मे अन्ना हजारे का साथ दिया था और इस बार आप ने साथ नहीं दिया तो ये आप की भी हार है और थोड़ी सी नैतिक जिम्मेदारी आप की भी बनती है |

जो लोग अन्ना हजारे का अपमान करते हुए अनाप शनाप बक रहे हैं उन्हें मै ये समझा दूं की आसमान की तरफ मुह कर के थूकने से थूक सूरज तक नहीं जाता खुद के मुह पर आ कर गिरता है, अन्ना हजारे का अपमान करने के पहले खुद देख लो की खुद की औकात क्या है, उस बूढ़े सनकी पागल सोच वाले इंसान के कारण ही आज सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ है अन्यथा हम सारे घोटाले चुप चुप सहते रहते और कुछ ना कहते तो उनकी कार्यशैली से जिसे नाराजगी हो वो उस शैली का अपमान करे या विरोध उनकी मर्जी पर उस इंसान का अपमान करने के पहले खुद के गिरेबान मे जरूर झांक लेना |

उस बूढ़े इंसान की नियत मे लोग शक कर रहे हैं, कुछ उन्हें स्वयम्भूः गाँधी कह कर अपमानित कर रहे हैं और कुछ जाने क्या क्या, अगर एक पल के लिए मान भी लिया जाये की अन्ना हजारे की नियत मे खोट है और वो गाँधी की जगह ही बैठना चाहते हैं तो मुझे उस बात से भी कोई आपत्ति नहीं है हर कोई सम्मान पाना चाहता है उन्होंने ही पाने की कोशिश कर ली तो क्या पाप कर दिया, आप उनके कामो को देखो उनकी उस मांग को देखो जो वो सरकार से कर रहे हैं, वो तो यही कह रहे हैं न की एक मजबूत कानून बनाओ जो भ्रष्टाचार से लड़ सके, उनकी कार्य शैली चाहे कुछ भी हो उनकी मांग तो जायज है न|

जो कांग्रेसी आज उनकी कार्यशैली का विरोध कर रहे हैं वो ही आज से ८० साल पहले गाँधी जी की कार्यशैली का समर्थन करते थे जबकि गाँधी भी कोई देव पुरुष नहीं थे, मै गाँधी का सम्मान करता हूँ उन्होंने बहुत किया है देश के लिए लेकिन मै इस बात से भी इंकार नहीं कर सकता की वो भगत सिंह की हत्या मे अंग्रेजो के समान ही गुनाहगार थे क्यूँ की उन्होंने भगत सिंह की फांसी रोकने की कोशिश नहीं करी और उसका कारण गाँधी जी का राजनैतिक एजेंडा ही रहा होगा क्यूँ की तब भगत सिंह की लोकप्रियता गाँधी जी के समान हो चुकी थी |

यहाँ मेरा ये बात लिखने का कारण महज इतना है की जो लोग अन्ना हजारे की नियत मे शक कर रहे हैं वो ये समझ लें की उनकी नियत चाहे कैसी भी हो उनकी मांग पूरी तरह देश हित मे है और उनके अनशन के असफल होने पर अगर आप उनका
अपमान कर रहे हैं तो आप उनका नहीं खुद का अपमान कर रहे हैं |

कुछ बाते और जो मै कहना चाहूँगा

१) इसमें कांग्रेस की भी बड़ी चाल थी की इस तरह से आखरी मे इस लोकपाल बिल को लाया जाये संसद मे की उस वक्त जनता अन्ना के साथ ना आये |
२) कांग्रेस का पिछला तजुर्बा भी रहा है की आम जनता एक दो बार तो अनशन को समर्थन दे देती है लेकिन जब यही बाते बार बार दोहरे जाती हैं तो जनता का विश्वास डगमगाता है जो की इन चतुर सुजानो को पहले से ही पता है, १०० साल का तजुर्बा है इन लोगो को |
३) भारतीय मीडिया मे भी जिस तरह से अन्ना हजारे के अनशन की असफलता को दिखाया गया है वो मीडिया की सच्चाई दिखा रही है की वो उसके साथ है जिसके साथ ताकत होती है, पहले जनता की ताकत अन्ना हजारे के साथ थी तो मीडिया उनके साथ थी आज खिलाफ हो गई है |
४) कुछ कार्टून इस तरह के भी है जिसमे अन्ना हजारे के अनशन की असफलता को क्रिकेट जैसे घटिया खेल की असफलता के बराबर रखते हुए दिखाया जा रहा है, उनसे कहूँगा की सोच को बड़ी करो कोई भी खेल देश से बड़ा नहीं है |

आखरी मे सिर्फ यही कहते हुए लेख का समापन करना चाहूँगा की ..अन्ना हजारे की नियत मे कोई कितना भी खोट दिखाए, मगर उनकी मांगो मे कोई पाप नहीं है और इल्जाम तो राम और कृष्ण पर भी लगाए जा चुके हैं और गांधी और नेहरु पर भी तो अगर इल्जाम अन्ना पर ही लग गया तो क्या हुआ |

अन्ना मैने आप का साथ नहीं दिया मै शर्मिन्दा हूँ
आगे साथ दूंगा शायद इसी लिए अभी भी जिन्दा हूँ

Monday, December 19, 2011

भारतीय मीडिया :--> डरपोक या प्रायोजित या बिका हुआ या अवसरवादी, या उपरोक्त सभी ?

भारतीय मीडिया :--> डरपोक या प्रायोजित या बिका हुआ या अवसरवादी, या उपरोक्त सभी ?

जी हाँ ये सवाल मै अपने पूरे होशो हवास मे कर रहा हूँ और उसका कारण सिर्फ इतना है की आज देश का बच्चा बच्चा अन्ना हजारे जी को जानता है और उनके आन्दोलन को भी लेकिन अगर एक पढ़ा लिखा युवक भी डॉ सुब्रमण्यम स्वामी की तस्वीर को

देखता है तो ये नहीं बता पाता की ये शख्श कौन है, और इसका कारण मै हमारी भांड मीडिया को ही मानूंगा | मै अन्ना हजारे का पूरा समर्थन करता हूँ और उनकी प्रशंशा से मुझे कोई गुरेज नहीं है लेकिन मै सिर्फ ये चाहता हूँ की डॉ सुब्रमण्यम स्वामी को भी मीडिया के जरिये उतना ही सम्मान मिलना चाहिए |

डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के कारण १ लाख ७६ हजार करोड रूपये का घोटाला सामने आया कनीमोझी जेल मे रही, राजा अभी भी जेल मे है, चिदम्बरम जेल जाने की तैयारी मे है, रोबर्ट वढेरा और सोनिया गाँधी जेल जाने के नाम से डरे हुए हैं, लिट्टे उनकी हत्या

का तलबगार है, ईवीएम मशीन का घोटाला उन्होने उजागर किया और उसके बाद भी उनका चेहरा एक आम भारतीय के लिए अनजान है इसकी वजह सिर्फ इतनी ही है की मीडिया उन्हें कवर नहीं कर रहा है, मीडिया उन्हें हीरो नहीं बना रहा |

मीडिया के कवर ना करने के पीछे क्या कारण हो सकता है आप ही सोचिये |

या तो मीडिया के ऊँचे अधिकारीयों को सरकारी तन्त्र ने डराया हुआ है की अगर आप ने कोई भी अच्छा कवरेज डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के लिए किया तो आप भी हमारे दुश्मन हो जायेंगे और आप के खिलाफ जांचे शुरू हो जाएँगी | इस डर के साथ ही मीडिया

को इस बात के लिए पैसे दिए जा रहे हैं की आप इस तरह की खबरे जो की सरकार विरोधी हो और डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के पास से आ रही हो प्रसारित मत कीजिये और बदले मे हम आप को ढेरो विज्ञापन देंगे ताकि आप की कमाई हो सके |

और आज चूंकि सोशल नेटवर्क के जरिये डॉ सुब्रमण्यम स्वामी की पहुँच आम जनता तक हो चुकी है तो मीडिया भी उन्हें कवर करना शुरू कर देगा सरकार के डर से अलग हट कर और अगर अब ऐसा होता है तो मीडिया को अवसरवादी कहना कही से भी

गलत नहीं होगा |

मेरे पास ऊपर कही बातों मे से किसी भी बात का सबूत नहीं है अगर होता तो यहाँ नहीं अदालत मे कह रहा होता लेकिन मै मेरी कही हर बात का तर्क जरूर दे सकता हूँ |

डरपोक तो इसलिए कहूँगा की जब इंसान की जरूरते हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो उसके ईमान मे उतनी ताकत नहीं रह जाती की जरूरत पड़ने पर जेल जा सके,  और हमारे मीडिया हाऊंस के अधिकतर बड़े अधिकारी किसी न किसी ऐसे काम मे लिप्त होते

ही हैं जो की गैर कानूनी होता है चाहे वो नैतिक काम हो या फिर आर्थिक अपराध इस लिए उन इंसानों का डरा होना कोई बड़ी बात नहीं और उसका नतीजा होता है पूरे सिस्टम मे उनके डर का असर |

प्रायोजित और बिका हुआ इस लिए कहूँगा क्योंकि जितने सरकारी विज्ञापन मैने समाचार विज्ञापनों मे और अखबारों मे मुख्य पन्नों पर देखे हैं उतने सरकारी विज्ञापन किसी भी पत्रिका मे या फिर किसी भी मनोरंजन चैनल मे नहीं देखे जबकि मनोरंजन

चैनलों को पहुँच समाचार चैनलों से कही ज्यादा है |

अवसरवादी इसलिए कहूँगा क्योंकि जैसे ही डॉ सुब्रमण्यम स्वामी सोशल नेटवर्क के जरिये प्रसिद्ध होने लगे मीडिया उन को कवर करना शुरू कर चुका है क्योंकि मीडिया जानता है की अगर अभी भी उन्हें हीरो नहीं बनाया तो देर हो जायेगी लेकिन फिर भी उन्हें

मीडिया ने वो स्थान आज तक नहीं दिया है खबरों मे होना चाहिए |

समस्त मीडिया को मेरी यही राय है की भांड गीरी छोड़ कर सच को दिखाओ, सिर्फ वो नहीं जिससे आप के पैसे बने बल्कि वो भी दिखाओ जिससे जनता सच को जाने और आप का पत्रकारिता धर्म आप को आशीष दे |


Sunday, December 18, 2011

"संत पर आक्रमण महेंगा पड़ा "


" एक सच्चे संत पर लाठियाँ चलाने का अंजाम कांग्रेस सरकार भुगत रही है ..चारो तरफ से फसी सरकार के सामने रोज सुबह एक परेशानी खड़ी होती है ..आखिर ऐसा क्यु हुवा ? जब की सरकार बाबा रामदेव जी के आन्दोलन के पूर्व अच्छी तरह से चल रही थी और जनता भी अच्छी तरह से सो रही थी ..जनता को पता ही नहीं था की उन्हें किस तरह से लुटा गया है मग़र रामलीला मैदान की घटना ने ६५ साल से सोई हुई जनता को जगा दिया सायद एक सच्चे संत पर प्रहार करने का श्राप कांग्रेस सरकार और गाँधी परिवार को लगा है |"

" ४ जून की रात के पूर्व भारत की जनता ५ साल में सिर्फ एक बार अपनी सरकार के बारे में सोचती थी और उतना ही पानी पीती थी जितना सरकार पिलाती थी और सरकार के असली चहरे से भारत की जनता बिलकुल अनजान थी ..४ जून की रात को बाबा रामदेवजी के आन्दोलन पर जो लाठियाँ बरसी गई उस लाठी ने सभी को सच्चे अर्थ में जगा दिया था वर्ना कौन जानता था "अन्ना हजारे" को भाई ?... दरअसल कांग्रेस सरकार भूल गई थी की उनके द्वारा बरसाई जानेवाली लाठी बाबा रामदेव पर नहीं बल्कि बरसो से सो रही देश की जनता के शरीर पर प्रहार करेगी और वही हुवा आखिरकार जनता जागी और जनता के जागने का परिणाम आज आप सब लोग देख रहे है की किस तरह कांग्रेस सरकार मुस्केलियो में फसी हुई है |"

" बाबा रामदेव अपना आन्दोलन तो पिछले कई बरसो से चला रहे थे मग़र जब उन पर लाठियाँ बरसी तो देश के बुद्धिजीवी सरकार का पक्ष ले रहे थे मग़र आज उन बुद्धिजीवी लोगो को भी ये सोचने का वक़्त आ गया है की बाबा रामदेव पर लाठियाँ चलने के बाद सरकार के सामने रोज नयी मुसीबत क्यु आ रही है ? ..जवाब यही मिलेगा की जनता जागी है ..जो सो रही थी ..बाबा रामदेव जी के आन्दोलन से हमें ये परिणाम मिला है और अभी अन्ना हजारे के आन्दोलन का परिणाम आना बाकि है भाई ..एक बार वो भी परिणाम आ जाने दो फिर देखो ये जागी हुई जनता क्या क्या करती है |"

* " कांग्रेस का हर दाव उल्टा क्यु पड़ रहा है ?"
" ४ जून के पूर्व जैसा कांग्रेस चाहती थी वैसा होता था इस देश में मग़र आज वही कांग्रेस का हर दाव उल्टा पड़ रहा है ...आप देखिये जरा याद कीजिये ...वो विवादस्पद कानून जिसे कांग्रेस लाना चाहती थी मग़र नाकामयाब रही, क्यु हुवा ऐसा जब की वही विपक्ष है जो ४ जून के पूर्व भी था ? मग़र विपक्ष ने भी देखा की जो आग लोगो के दिल में जल रही है वो आग ये कानून के पास होने से उनको भी जला देगी और लोगो ने भी जम कर किया था विरोध ..शायद आप पाठक लोगो ने भी अपनी अपनी तरह से किया होगा विरोध ...."ऍफ़डीआई" का विरोध भी तो नजर अंदाज़ नहीं करना चाहिए जिसे कांग्रेस जबरदस्ती से जनता पर थोपना चाहती थी इस वक़्त भी वही सरकार थी ..वही विपक्ष था और वही जनता थी ...मग़र ४ जून की रात ने सब कुछ बदल दिया और होने लगा कांग्रेस सरकार के एक एक कदम का विरोध ..४ जून के पूर्व यही सरकार अनेको घोटाले करके मजे से जनता को लुट रही थी मग़र आज यही सरकार ..जुन्ज रही है ..ये है बाबा रामदेव जी के आन्दोलन का चमत्कार |"

* " अन्ना के लोकपाल का इंतज़ार है |
"अन्ना हजारे के आन्दोलन का परिणाम आएगा तब आएगा मग़र बाबा रामदेव जी के आन्दोलन का परिणाम तो आ चूका है ...ऐसा नहीं है की मै अन्ना हजारे जी का विरोधी हु ..मग़र मै उस सच्चाई को चाहता हु जो सच है और जो बात देश हित में हो उसका मै स्वागत भी करता हु और इंतज़ार कर रहा हु की अन्ना हजारे जी का आन्दोलन भी सार्थक हो और सफलता उन्हें मीले और देश की जनता को एक अच्छा लोकपाल कानून भी मीले... |

* कौन जानता था ?
" क्या आप ४ जून के पूर्व "आरटीआई " कानून का इस्तेमाल करना जानते थे ?या फिर आपने ४ जून के पूर्व कभी इस कानून का इस्तेमाल किया था ? क्या आप अपनी सरकार के प्रति जितने गंभीर आज है उतने गंभीर ४ जून की पूर्व थे ? कितनो को पता था की स्विस बैंक में पड़ा "कालाधन" कितना है ..मग़र आज देश का छोटा बच्चा भी जनता है की ५६% काला धन हमारे भारत देश का है जो आज विदेश की बैंक में पड़ा है जिस पर हमारा ..हम सब का हक़ है ,देश कौन चला रहा है ये मायने नहीं रखता है मग़र देश किस तरह से चला रहे है ये सोचनेवाली बात है ..चाहे जो भी इस देश पर राज करे मग़र वो साफ़ तो होना ही चाहिए |"

" अन्ना हजारे का आन्दोलन है मजबूत लोकपाल लाने के लिए तो बाबा रामदेव का आन्दोलन है विदेशो में पड़े कालेधन को वापस लाने के लिए ...ये दोनों ही आन्दोलन देखा जाये तो भारतवासियों के हित के लिए ही है और इन आन्दोलन में इन्हें सफलता भी मिलनी ही चाहिए और ये सफलता तब मिल सकती है जब हम सब मिलकर उनका साथ देंगे ..ऐसा साथ देना होगा हमें की सरकार सिर्फ झुके ही नहीं मग़र अपने फैसले पर त्वरित अमल भी करे ..क्यु की आखिर ये सरकार हमारी है और हमारे पैसो से ही चलती है ..इन नेताओं का पैसा तो विदेशो में काले धन के रूप में जो पड़ा है ..ये नेता और ये सरकार को पगार हम ही देते है और मालिक को ये अधिकार भी होता है की नौकर को उसकी गलती पर सवाल पूछे जाये ये फिर नौकरी से निकाला जाये |"

* याद रहे :
" स्विस अधिकारियो ने ये कहा था की बाबा रामदेव के आन्दोलन से उनको नुकसान उठाना पड़ा है और बाबा रामदेव वहां की मिडिया में भी छाए हुवे थे |"

::::
:::
::
:

Wednesday, December 14, 2011

एक अजगर - सोनिया गाँधी ध पावर ( विडियो के साथ )


" विश्व की सबसे शक्तिशाली महिला के रूप में सोनिया गाँधी का नाम लिया जा रहा है, भारत देश के किसी भी सांसद के पास इतनी ताकत नहीं है मग़र सोनिया का सिक्का सभी जगह चलता है फिर चाहे कानून हो या बैंकिंग या फिर हो देश की राजनीती सोनिया का जलवा आपको सभी जगह दिखाई देगा ही, भारत के राजनैतिक इतिहास में ऐसा पहली बार दिखाई दे रहा है की भारत सरकार ..प्रधानमंत्री ...और राष्ट्रपति भी एक सांसद को पूछे बिना पानी तक नहीं पीते है और उस शक्तिशाली सांसद का नाम है " सोनिया गाँधी " |"

* आखिर ऐसा क्या है सोनिया में ?
" कुछ बातो को जरा याद करो ..आप सोनिया की ताकत का अंदाज़ा इस बात से भी लगा सकते है की देश का सर्वोच्च स्थान याने राष्ट्रपति गाँधी परिवार की सबसे वफादार प्रतिभा पाटिल को बनाया गया और जितने भी महत्वपूर्ण पद है उन सभी पदों पर गाँधी परिवार के वफादार ही आपको नजर आयेंगे ..इसीलिए जब देश की जनता महेंगाई की चक्की में सरेआम पिसती नजर आ रही है और अनेक फरियाद के बावजूद भी जनता या आमआदमी गाँधी परिवार के वफादारो का बाल भी बांका नहीं कर सका है आजतक जिसका अंदाज़ा आप फूलपुर की सभा के दौरान हुई मारपीट लगा सकते है या फिर रामलीला मैदान की घटना से भी लगा सकते है मग़र यहाँ पर भी सांसदों और सरकार के पक्ष में ही बयान दिया गया की ये कैसा जंगल राज है ?...शायद इन्होने सही कहा था की ये जंगल राज ही है आखिर राज किसका है भाई ?

* "आर टी आई " बेबस है |
" आर टी आई " कानून सभी सरकारी खाते एवं सांसद सभ्यों पर लागु हो सकता है मग़र सोनिया गाँधी पर यही कानून बेबस और बेअसर है तो इसका मतलब ये हुवा की सोनिया गाँधी "आर टी आई" से भी ज्यादा पावरफुल है या फिर यही कानून को बनानेवाले पर ये कानून असर नहीं करता है ?..यहाँ पर एक तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री जी सोनिया गाँधी जो सिर्फ एक सांसद है उसके पैर छुते नजर आये थे तो क्या इस देश का सांसद ...प्रधानमंत्री से भी ज्यादा महत्त्व रखता है ? "

* क्यु कहा सोनिया पावर ?
" संविधान और मानवता ४ जून की रात रामलीला मैदान में सराजाहर टूट रही थी मग़र कोई कुछ बीगाड नहीं सका ,राजस्थान में मुस्लिम परिवार को सरेआम काटा जा रहा था जिसे मौत का तांडव कहा जाये मग़र इस देश की मिडिया ने भी कभी राजस्थान के गहलोत सरकार को कभी मानव भक्षी नहीं कहा क्यु की ये सरकार कांग्रेस की थी देश में हो रहे हजारो करोडो के घोटो के बावजूद भी इन घोटालो का जिम्मा लेकर केंद्र की कांग्रेस सरकार इस्तीफा नहीं देती है शायद इन घोटालो के खिलाफ के सबूत अभी तक मिटे नहीं है ये सरकार ने आते ही भोपाल कांड के आरोपियों को मामूली सजा दिलवाई और राजीव गाँधी और कांग्रेस सरकार को बचा लिया यहाँ तक की बोफोर्स घोटाले का आरोपी क्वोत्रोची भी हाथ नहीं आया था ...शायद इसी को कहते है सोनिया ध पावर क्यु ?

* इंदिरा गाँधी से भी ज्यादा चालाक है सोनिया |
" सोनिया गाँधी इंदिरा गाँधी से भी ज्यादा चालाक और धूर्त निकली है और जब तक सोनिया गाँधी का पावर चल रहा है तब तक देशवासीयो के लीये "स्विस बेंक " में पड़े कालेधन को वापस लाना महज एक सपना बन जायेगा क्यु की इस सूचि में " राजीव गाँधी" का नाम सबसे ऊपर है और सोनिया गाँधी ये कभी नहीं चाहेगी की राजीव गाँधी का नाम उजागर हो |"

* जहरीला अजगर याने सोनिया गाँधी |
" सोनिया गाँधी एक जहरीले अजगर की माफिक इस देश के संविधान को ..इस देश के गरीब लोगो को ..इस देश के राष्ट्रिय खजाने को निगल गई है ,यहाँ तक की मिडिया ,न्याय व्यवस्था ,एवं सरकारी अफसरों से लेकर भारत के प्रंतप्रधान ,राष्ट्रपति को भी नहीं छोड़ा है शायद यही वजह है की आज तक सोनिया की बीमारी और उसके विदेश दौरे भारत की जनता के लीये महज एक सवाल बनकर रहे गए है और ये सवाल ..सवाल बनकर ही रहेंगे क्यु की "सोनिया ध पावर" के आगे बेअसर है भारत की जनता के हाथ में दिया कानून याने "आरटीआई " क्यु की "आरटीआई" के दायरे से बाहर है भारत की महज एक सांसद सोनिया गाँधी, फिर चाहे उनके निजी विदेश दौरे में १८०० या २००० करोड़ क्यु ना खर्च हो भाई ?

* यहाँ पर झुकती है मिडिया |
" गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के पैरो तले चीटी भी आ जाये तो मिडिया हंगामा कर देती है ..मानव भक्षी ...खुनी हाथवाले ...मग़र राजस्थान में खेले गए तांडव को मिडिया कुछ नहीं कहेती है तो क्या मिडिया भी सोनिया ध पावर के आगे झुकती है ? अगर नहीं झुकती है तो फिर जनता के सामने कांग्रेस और सोनिया के घोटाले को उजागर क्यु नहीं करती है ?

* दुर्दैव
" दुर्दैव है की देश के चोर और लुटेरे नेता के नाम के आगे " आदरणीय , माननीय "जैसे सब्दो का इस्तेमाल करना पड़ता है फिर चाहे इन नेताओं की हैवानियत को पुरे विश्व ने ही क्यु ना देखा हो ? ये सब माया है ...माया है सोनिया पावर की

ये विडिओ अवस्य देखिएगा शायद आपको पसंद भी आये



यहाँ पर भी नजर करियेगा हुजुर : देखिये और पढ़िए जनाब

:::::::::
::::::::
:::::::
::::::
:::::
::::
:::
::
:

Monday, December 12, 2011

अलकायदा और लिट्टे की चाहत सुब्रमण्यम स्वामी की मौत ... मेरी राय



वीना मलिक की विवादित तस्वीरे देखने के लिए FHM पत्रिका उठाई तो देखा पढते पढते एक आलेख पर नजर गई |

उस आलेख पर नजर जाने के बाद दिमाग से वीना मालिक तो पूरी तरह से निकल गई और दिमाग मे दूसरी बातों ने जगह कर ली, वो पूरा आलेख पढ़ा और एक नया आलेख लिखने बैठ गया |


उस आलेख के शीर्षक मे लिखा था "अलकायदा और लिट्टे उनकी मौत चाहता है" | इस एक पंक्ति से मेरे दिमाग मे कई सवाल आना शुरू हो गये हैं जो की मै आप के सामने रख रहा हूँ |

सुब्रमण्यम स्वामी के दुश्मन अगर कोई हो तो वो होना चाहिए भारत के भ्रष्ट राजनेता जिनके पीछे सुब्रमण्यम स्वामी नहा धो कर पड़े हुए हैं, पर यहाँ तो लिट्टे और अल कायदा जैसे आतंकी संस्थान इनकी जान के दुश्मन बने हुए हैं | उन्होंने सभी आतंकवादी संगठनो को आड़े हाथो लिया है फिर सिर्फ अल कायदा ही क्यों उन्हें धमकी दे रहा है | लिट्टे से भी धमकी मिल रही है , जबकि लिट्टे ये अच्छा से जानता है की स्वामी के कुछ कहने से उसका कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं हो जायेगा वही हाल अलकायदा का भी होगा, पर फिर भी इन दो संगठनों ने ही धमकी क्यों दी |

स्वामी का कहना है की सोनिया गाँधी के लिट्टे से सम्बन्ध हैं, उनके पास इस बात के सबूत भी है, तो लिट्टे की धमकी का मतलब ये लगाया जाये की हाँ सोनिया गांधी और लिट्टे के बीच संबंध हैं और राजीव गाँधी की मौत के बाद भी उनके हत्यारों को कांग्रेस द्वारा माफ़ी देने की शिफारिश का शायद यही मतलब निकल सकता है |

मेरा दूसरा सवाल ये है की अलकायदा को स्वामी से क्या समस्या है, यही बात स्वामी जी से पूँछी तो उनका कहना था की वो आतंकवाद के खिलाफ बोलते हैं शायद इस लिए पर उनका जवाब मेरे गले नहीं उतर रहा जितना स्वामी बोलते हैं आतंकवाद के खिलाफ उतना तो कई दुसरे लोग भी बोलते हैं पर उनको धमकी क्यों नहीं मिल रही | या सिर्फ अलकायदा से ही धमकी क्यों मिली , क्या इस लिए की वो सब आतंकवाद के खिलाफ तो बोलते हैं पर भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं | स्वामी जी ने लिट्टे के साथ सोनिया गाँधी के सम्बन्ध है ऐसा कहा है लेकिन अल कायदा के साथ ये बात नही कह पाए शायद उसका कोई सबूत उनके पास नहीं है पर मुझे ये कहने के लिए सबूत की नहीं अटकलों की जरूरत है |

अब आप सोचिये की अगर अल कायदा सिर्फ स्वामी के भ्रष्टाचार विरोधी कार्यों के कारण उनका दुश्मन बना है तो इसका क्या मतलब है, मेरी सोच इस बात की तरफ इशारा करती है की अल कायदा जैसे संगठन को इससे क्या लेना देना | सीधा जवाब है जितना बड़ा घोटाला हुआ है उतने पैसे किसी ऐसे हवाला के माध्यम से ही देश के बाहर भेजे जा सकते हैं जिसका नेटवर्क पूरी दुनिया मे फैला हुआ हो और ऐसा नेटवर्क अलकायदा से बेहतर किसका हो सकता है | मुमकिन है की अगर इसमें अलकायदा का नाम सामने आ गया तो इस वजह से उसकी दुकानदारी बंद हो जायेगी और उसे भारतीय भ्रष्ट नेताओं से मिलने वाला पैसा मिलना बंद हो जायेगा |

अगर मेरी सोच सही है और ऐसा ही हो रहा है तो देश के लिए कितना बड़ा खतरा है वो आप ही सोचिये | हमारे देश का पैसा आतंकवाद को फैलाने के काम आएगा और उस पैसे से गोला बारूद हमारे ही घरों मे चलाया जायेगा | जो कहते हैं की हमारे देश के नेता ऐसा नहीं कर सकते मै उनसे यही पूंछूंगा क्या बोफोर्स मे घोटाला नहीं हुआ, क्या आदर्श सोसायटी मे घोटाला नहीं हुआ और इन सब मे नेता के साथ साथ आर्मी वाले भी शामिल थे तो अगर आर्मी ऐसे जगहों पर घोटाले कर सकती है तो नेता तो उनसे चार नहीं चालीस कदम आगे जा सकते हैं |

और अगर किसी के KGB और लिट्टे के साथ सम्बन्ध हो सकते हैं, हमास ग्रुप से ट्रेनिंग ले सकता है कार्ला ब्रूनी से फ़्रांसीसी विमान खरीदने के लिए रिश्वत की बात कर सकता हैं तो पैसे के लिए अलकायदा का इस्तेमाल हवाला के लिए क्यों नहीं कर सकता |  

सब से बड़ी बात इन सब के बाद भी हमारे देश की निक्कमी व्यस्था स्वामी जी की सुरक्षा का इन्तेजाम तो कर नहीं रहे उल्टा देश के सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित घराने के दामाद के गुंडे उन्हें डराने की कोशीश जरूर करते हैं |

दोस्तों मेरा सिर्फ इतना ही कहना है की हम अन्ना हजारे का साथ दे रहे हैं पर हमें सुब्रमण्यम स्वामी का भी साथ उतनी ही शिद्दत से देना होगा तभी देश इन भ्रष्ट लोगो से मुक्त हो पायेगा |

Sunday, December 11, 2011

अश्लीलता आ गई है लगे रहो : सत्यनाश हो इसका





"अश्लीलता रही है जनाब पहले इस देश में घूंघट था, मग़र अब कपडे उतरने की स्पर्धा मानो लगी है ..जिसे फेशन का नाम दिया जा रहा है ,मंदिरा बेदी ,फिल्म स्टार योगिता ,फिल्म स्टार पूनम पांडे ,विना मलीक ... और अब आई है एक पोर्न स्टार ..इन सब को बढ़ावा देने के लिए तैयार है हमारा "कलर चेनल " और वो भी एक कमाल के नाम के साथ "बिग बॉस "|"
" सलमान खान जितने मशहूर अपनी फिल्म में शर्ट उतारने के लिए है उतने ही मशहूर वो अपने अभिनय में भी है मग़र आज वो ऐसे शो का प्रतिनिधित्व कर रहे है जिसमे एक पोर्न स्टार काम कर रही है क्या ऐसे शो से भारत की अच्छी संस्कृति सुधरेगी या फिर .....सरकार फिल्म में सेंसर रखती है ..इश्तेहार में सेंसर रखती है मग़र ऐसे वाहियात शो में सेंसर कहा घास खाने गया था ? "

* तैयार हो जाओ पोर्न स्टार रही है |"

" ये सब किस लिए अपनी "टी आर पी" बढाने के लिए और देश की संस्कृति को मिटटी में मिलाने के लिए ही ना जहाँ नारी का सन्मान होता हो ..जहाँ नारी का असली गहेना उसकी इज्जत होती हो आज वही देश में कपडे उतारने की स्पर्धा लगी है फेशन के नाम पर क्या इस तरह से नारी आधुनिक हो सकती है ? क्या आधुनिकता सीको कहते है ? की कभी भी कपडे उतारो और अपनी नंगी तस्वीरे लोगो को दिखाओ ? जो लोग ऐसी वाहियात बात को आधुनिकता कहते है उनसे मै यही कहेना चाहूँगा की आप भी ऐसी आधुनिकता पर अमल करो और आधुनिक बन जाओ |"

* आनेवाला कल कैसा होगा ?
" अगर ऐसा ही आधुनिकता के नाम तले चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं की कल को हमारी बेटियाँ भी हमारे पास आये और बोले की " पापा ये मेरी न्यूड तस्वीर तो देखो मै कितनी सेक्सी लग रही हु ? ".. शायद ऐसा ही होगा हमारा आनेवाला कल ,क्यु की हम जरूरत से ज्यादा आधुनिक बनते जा रहे है अपनी संस्कृति को नष्ट करते करते ...ऐसी अश्लीलता भरी वाहियात बात का विरोध नहीं कर रहे है हम तो नतीजा यक़ीनन यही आएगा |"

* विदेश जैसा हाल होगा भारत में भी |
" आधुनिक फेशन के नाम पर जो खिलवाड़ हमारे साथ खेला जा रहा है उसका नतीजा विदेश जैसा भी हो कता है जैसे विदेशो में शादी भी नहीं होती है और एक बच्चे की माँ बन जाती है लडकिया ..." मुबारक हो आप नाना बन गए |"..."मग़र बेटी तुम्हारी तो शादी भी नहीं हुई है " ..ओह कम ओन पापा ..तो क्या हुवा ? आप इतने ओल्ड फेशन भी मत बनो पापा |" ...शायद यही संवाद हमें भी सुनने मिलेंगे ..जैसे विदेश में मिलते है ..करो और स्वागत करो ऐसी अश्लीलता का ..कल यही अश्लीलता आपके घर पर भी हमला कर सकती है उस वक्त भी कहेना फेशन है |"

" मै मॉडर्न बनने के खिलाफ नहीं हु मगर मॉडर्न में जब अश्लीलता जाती है तो दर्द होता है ..क्या भारत की नारी इतनी कमजोर बन गई है की अब उनको अपनी इज्जत दाव पर लगाकर आधुनिक कहेलाना पड़ रहा है ? वाहियात फेशन के जरिये आप आधुनिक बन सकते है मग़र अपना जमीर ...अपनी इज्जत बेचकर ..फेशन के नाम पर कम वस्त्र पहेनना गलत नहीं है मग़र उन कम वस्त्र में अश्लीलता जाये तो ये गलत जरूर है |"

* फर्क देखिये :
" कम पढ़ी लिखी औरत अपनी इज्जत को अपना गहेना समजती थी और आज की पढ़ी लिखी औरते अपनी इज्जत को सरे आम लीलाम कर रही है |".... क्या इसे कहा जाता है आधुनिक ? ...बिकाऊ "नारी संघठन " अँधा भी है क्यु की इस बात का विरोध करने पर उनको पैसा नहीं मिलता है ...मग़र अपने अपने दिल से पुछो दोस्तों क्या जो आज की परिश्थिति में हो रहा है वो सही है या गलत ?

" आज "टीवी" देखो "तस्वीरे" देखो ..कल को यही अश्लीलता आपके घर में आती हुई भी देखो |"




: : :
: :
: